मनुस्मृति के एक श्लोक को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। अब विश्व हिंदू परिषद ने पलटवार करते हुए राहुल गांधी को दूसरे धार्मिक ग्रंथों और चुनिंदा उद्धरणों के मुद्दे पर चुनौती दी है। क्या है पूरा मामला? जानिए...
विश्व हिंदू परिषद ने मनुस्मृति को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टिप्पणी पर रविवार को प्रतिक्रिया दी। संगठन ने राहुल पर मनुस्मृति के एक श्लोक को बिना सही संदर्भ के पेश करने का आरोप लगाया। वीएचपी ने यह भी पूछा कि क्या कांग्रेस नेता महिलाओं को लेकर दूसरे धर्मों के धार्मिक ग्रंथों में कही गई बातों को भी सार्वजनिक रूप से उद्धृत करने का साहस दिखाएंगे।
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राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में अपने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान छात्राओं से बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने मनुस्मृति का एक श्लोक उद्धृत किया था। राहुल गांधी ने कहा था कि इसमें महिला को बचपन में पिता, युवावस्था में पति और पति की मृत्यु के बाद पुत्रों के अधीन बताया गया है। उन्होंने इस व्यवस्था को शर्मनाक बताते हुए कहा था कि पिता, पति और बेटे के अलावा महिलाओं की अपनी अलग पहचान है।
विवाद से जुड़ी पांच मूल बातें
वीएचपी ने राहुल गांधी पर युवाओं के मन को ‘अशुद्ध मानसिकता’ से दूषित करने का आरोप लगाया।
विनोद बंसल ने राहुल से पूरी मनुस्मृति पढ़ने की सलाह दी।
वीएचपी ने कहा कि राहुल संतों और टीकाकारों से इसके अर्थ को समझें।
संगठन ने चुनिंदा उद्धरणों और उनके कथित विकृत अर्थों पर सवाल उठाया।
वीएचपी ने ‘मनुस्मृति बनाम संविधान’ की बहस को इतिहास और संस्कृति के साथ अन्याय बताया।
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विनोद बंसल बोले- एक श्लोक से हिंदू समाज को कटघरे में न खड़ा करें
वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि मनुस्मृति का केवल एक श्लोक चुन लेना और उसे बिना समझे हिंदू समाज को कटघरे में खड़ा करना आसान है। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि वह देश के युवाओं के शुद्ध मन को अपनी ‘अशुद्ध मानसिकता’ से दूषित न करें।
विनोद बंसल ने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि क्या वह महिलाओं के बारे में कुरान, बाइबिल और अन्य अब्राहमिक धार्मिक ग्रंथों में कही गई बातों को भी सार्वजनिक रूप से उद्धृत करने का समान साहस दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि राहुल को पहले पूरी मनुस्मृति पढ़नी चाहिए और संतों व टीकाकारों से इसे समझने के बाद हिंदू समाज को लेकर टिप्पणी करनी चाहिए।
‘चुनिंदा उद्धरणों से सच सामने नहीं आता’
वीएचपी प्रवक्ता ने कहा कि चुनिंदा उद्धरण और उनके विकृत अर्थ राजनीति को तो प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन उनसे सच्चाई सामने नहीं आती। उन्होंने मनुस्मृति के एक अन्य श्लोक का हवाला देते हुए दावा किया कि नारी शक्ति देश की सभ्यता की पहचान रही है। बंसल ने राहुल गांधी पर राजनीतिक भाषणों के लिए इसे ‘मनुस्मृति बनाम संविधान’ की लड़ाई बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसा करना इतिहास और संस्कृति, दोनों के साथ अन्याय है।