कांग्रेस की खाट सभाओं के चलते खाट के भी ठाठ आ गए है। मार्केट में नए-नए डिजाइन की खाट पहुंच गईं हैं। खाट भी ऐसी कि अगर बंगले के बेडरूम में पहुंच जाए तो शान बढ़ा दे। गांव की चौपालों पर तो चारपाई पर बैठकर खूब सियासी चर्चे हो रहे हैं। कई जगह तो खाट का नाम भी कांग्रेस वाली खाट कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और बिहार के गांवों में खाट का चलन सबसे ज्यादा रहा। अगर किसी की चौपाल पर आठ दस खाट पड़ी हैं तो माना जाता था कि वह उस गांव का बड़ा आदमी है। लेकिन धीरे धीरे खाट घरों से दूर होने लगी। फोल्डिंग पलंग आ गए। चौपालों पर मूढ़ा और कुर्सियां बिछ गईं। लेकिन इस साल जैसे ही कांग्रेस ने खाट की ब्रांडिंग शुरू की। राहुल गांधी खाट सभा करने लगे।
सियासी मंच पर खाट पहुंच गई तो मार्केट भी उसी तरह से तैयार हो गया। डिजाइनदार खाट बन रही हैं। सादा बान वाली खाट, प्लास्टिक के बान वाली चारपाई, निबाड़ वाली खाट, कपड़े वाली खाट, प्लास्टिक की चादर वाली खाट तैयार हो रही हैं। मथुरा में खाट की 35 दुकानें हैं। दुकानदार वीरेंद्र कुमार बताते हैं कि खाट की बिक्री तो पिछले वर्षों में बहुत कम हो गई है। शहरों से तो खरीदारी होती ही नहीं है। गांव में जरूर खाट जा रही है। लेकिन पहले सादा खाट ही बनती थी और अब कई डिजाइन आ गए हैं।