सोनिया गांधी की आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' नवंबर में प्रकाशित होने जा रही है। राहुल गांधी ने इस मौके पर अपनी मां के संघर्ष, साहस और निजी जीवन को याद करते हुए भावुक संदेश लिखा है। आत्मकथा में सोनिया गांधी के इटली के बचपन, राजीव गांधी से प्रेम और विवाह, गांधी परिवार में प्रवेश, इंदिरा और संजय गांधी की मौत, राजनीति में आने के कारणों और 2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग शामिल हैं। किताब के जरिए वह छह दशकों के भारत के सामाजिक और आर्थिक बदलावों को भी अपने निजी अनुभवों की नजर से सामने रखेंगी।
नवंबर में आएगी सोनिया गांधी की आत्मकथा
सोनिया गांधी इस नवंबर में अपनी आत्मकथा लेकर आ रही हैं। इसमें वह भारत के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक में शादी के बाद अपने जीवन, अपने पति राजीव गांधी की उस त्रासद मौत के बारे में बताएंगी, जिसने उन्हें राजनीति की 'सार्वजनिक दुनिया' में ला खड़ा किया, और 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने से इनकार करने समेत अपने जीवन के कई अनछुए पहलुओं को साझा करेंगी।
10 नवंबर को प्रकाशित होगी 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव'
अमेरिकी प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस की इम्प्रिंट अल्फ्रेड ए. नॉफ ने मंगलवार को घोषणा की कि'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' 10 नवंबर को बाजार में आएगी। हालांकि, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने भारत में किताब के प्रकाशन की तारीख की अभी पुष्टि नहीं की है।
'सिर्फ प्रियंका और मैं जानते हैं आपने क्या सहा?'
इस मौके पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपनी मां के लिए लिखे संदेश में कहा,'मां, मैंने आपको और पापा को आखिरी बार 35 साल से भी अधिक समय पहले साथ देखा था। जिस दिन से पापा हमें छोड़कर गए, उस दिन से मैंने आपको जिंदगी की ओर से सामने आई हर चुनौती का सामना अटूट साहस और गरिमा के साथ करते देखा है।'सिर्फ प्रियंका और मैं ही वास्तव में जानते हैं कि आप किन परिस्थितियों से गुजरी हैं और पापा के बाद आपकी जिंदगी कितनी कठिन रही। मैं खुश हूं और मुझे इस बात पर बेहद गर्व है कि आपकी कहानी 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' आखिरकार उन लाखों लोगों तक पहुंचेगी, जो आपसे प्यार करते हैं। मैं जानता हूं कि आपके जैसी निजी जीवन को हमेशा अपने तक रखने वाली शख्सियत के लिए दुनिया के सामने अपनी खूबसूरत कहानी रखना कितना कठिन रहा होगा।'
राजीव गांधी के जन्मदिन पर राहुल का भावुक संदेश
राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि आज, अपने पिता राजीव गांधी के जन्मदिन पर, वह कल्पना कर सकते हैं कि 'पापा ऊपर से मुस्कुरा रहे होंगे और अपनी खूबसूरत सोनिया को गर्व से देख रहे होंगे।'राजीव गांधी का जन्म 1944 में आज ही के दिन हुआ था।
कैम्ब्रिज से शुरू होती है कहानी
अल्फ्रेड ए. नॉफ की वेबसाइट के अनुसार, यह आत्मकथा इंग्लैंड के कैम्ब्रिज से शुरू होती है। वर्ष 1965 में 19 वर्षीय छात्रा सोनिया मैनो 'पहली नजर में उस आकर्षक युवक से प्यार कर बैठती हैं, जिससे आगे चलकर उनका विवाह होना तय है राजीव गांधी।'
इटली के बचपन से भारत तक का सफर
79 वर्षीय सोनिया गांधी ने सार्वजनिक मंचों पर अपने निजी जीवन के बारे में बेहद कम बातें साझा की हैं। आत्मकथा में वह युद्ध के बाद के इटली में अपने बचपन से लेकर उस प्रेम कहानी तक का जिक्र करती हैं, जो उन्हें भारत ले आई। इसके बाद वह उन गहरे सदमों और दुखों को भी सामने रखती हैं, जिन्होंने न केवल उनके जीवन की दिशा बदली, बल्कि उनके अपनाए हुए देश के भविष्य को भी प्रभावित किया।
2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने का फैसला
किताब में सोनिया गांधी के उस फैसले का भी जिक्र है, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 2004 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री बनने का अवसर दिया था, लेकिन उन्होंने यह पद स्वीकार नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह को सरकार का नेतृत्व करने के लिए चुना।
इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात और परिवार में प्रवेश
आत्मकथा में सोनिया गांधी अपनी 'प्रभावशाली सास' और भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से परिचय का भी जिक्र करती हैं। वह बताती हैं कि किस तरह उन्होंने हिंदी बोलना सीखा, साड़ी पहनने की आदत डाली और भारतीय व्यंजनों का स्वाद लेना शुरू किया। राजीव गांधी की पत्नी और दो छोटे बच्चों की मां के रूप में अपने शुरुआती वर्षों के दौरान उन्होंने कई बड़ी घटनाओं को करीब से देखा। इनमें उनके देवर संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत और उसके बाद इंदिरा गांधी की हत्या जैसी त्रासद घटनाएं शामिल थीं।
छह दशकों के भारत को देखने का निजी नजरिया
यह आत्मकथा पिछले 60 वर्षों में भारत में हुए आर्थिक और सामाजिक बदलावों पर एक अंदरूनी नजरिया पेश करने का प्रयास करती है। इसमें सोनिया गांधी अपने निजी अनुभवों के माध्यम से देश और राजनीति में आए व्यापक बदलावों को भी सामने रखती हैं।
'अपने जीवन के बारे में लिखना मेरे लिए आसान नहीं था'
सोनिया गांधी ने कहा है कि अपने जीवन के बारे में लिखने का मतलब खुद को भावनात्मक रूप से खोलना और उन अनुभवों को साझा करना था, जिन्हें उन्होंने वर्षों से अपने भीतर गहराई से संजोकर रखा था। उन्होंने बताया कि दिल टूटने और अपनों को खोने के अनुभवों ने उन्हें अंततः राजनीति की दुनिया में प्रवेश करने के लिए मजबूर किया।
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निजी जिंदगी से सार्वजनिक जीवन तक का सफर
अल्फ्रेड ए. नॉफ की ओर से मंगलवार को जारी बयान में सोनिया गांधी ने कहा, 'उस समय तक मैंने अपनी निजता की बहुत सख्ती से रक्षा की थी।' उन्होंने कहा, 'अपने जीवन के बारे में लिखना मेरे लिए आसानी से नहीं हुआ। इसका मतलब था खुद को खोलना, उन पलों और अनुभवों को साझा करना, जिन्हें मैंने हमेशा अपने भीतर गहराई से संभालकर रखा था।'