फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्या भ्रमित हो गए राहुल?: डोकलाम नहीं, गलवां तनाव के वक्त सेना प्रमुख थे जनरल नरवणे, जानें दोनों में क्या हुआ

Mon, 02 Feb 2026 09:06 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

राहुल गांधी के भाषण में भारत-चीन के किस संघर्ष का जिक्र किया जा रहा था? पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की जिस अप्रकाशित किताब के बारे में राहुल गांधी सदन में बोल रहे थे, उसके जो भी अंश अब तक सामने आए हैं, उनमें भारत-चीन के बीच किस तनाव का जिक्र है? डोकलाम और लद्दाख के क्षेत्र में क्या फर्क है? इसके अलावा दोनों जगहों पर भारत-चीन के टकराव में कितना अंतर था? आइये जानते हैं...
विज्ञापन
राहुल गांधी के लोकसभा में दिए बयान पर चर्चाएं तेज। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संसद में सोमवार राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान हो रही चर्चा के दौरान जमकर हंगामा हुआ। टकराव की वजह भारत और चीन के बीच का तनाव था। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसी टकराव का मुद्दा उठाते हुए पूर्व सेना प्रमुख जनरल (रिटायर्ड) मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब और एक मैगजीन में छपी रिपोर्ट तक का जिक्र कर दिया। 
विज्ञापन


राहुल ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा, "यह उस वक्त की बात है, जब चीन के टैंक भारत के क्षेत्र में घुस रहे थे, वे डोकलाम में एक रिज (पहाड़ी भूभाग) पर कब्जा करने वाले थे। यह जनरल नरवणे की आत्मकथा का हिस्सा हैं।" राहुल के इस बयान के बाद ही हंगामा शुरू हो गया। हंगामे के चलते संसद को पहले दो बजे, फिर तीन बजे और चार बजे तक के लिए स्थगित किया गया। आखिर में सदन को मंगलवार (3 फरवरी) तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

संंबंधित वीडियो

हालांकि, इस बीच जो एक अहम सवाल उठा, वह यह था कि राहुल गांधी आखिर भारत-चीन के बीच किस घटना का जिक्र कर रहे थे? दरअसल, राहुल ने भाषण के दौरान ही दो अलग-अलग क्षेत्रों- डोकलाम और कैलाश रिज का जिक्र कर दिया। वहीं, राहुल डोकलाम की घटना का जिक्र करते हुए उस दौर के आर्मी चीफ रहे बिपिन रावत की जगह जनरल एमएम नरवणे को सेना प्रमुख बुलाते रहे। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों ने सवाल पूछे हैं।

ऐसे में यह जानना अहम है कि राहुल गांधी के भाषण में भारत-चीन के किस संघर्ष का जिक्र किया जा रहा था? पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की जिस अप्रकाशित किताब के बारे में राहुल गांधी सदन में बोल रहे थे, उसके जो भी अंश अब तक सामने आए हैं, उनमें भारत-चीन के बीच किस तनाव का जिक्र है? डोकलाम और लद्दाख के क्षेत्र में क्या फर्क है? इसके अलावा दोनों जगहों पर भारत-चीन के टकराव में कितना अंतर था? आइये जानते हैं...

जनरल नरवणे की किताब के जो अंश आए, उनमें किस तनाव का जिक्र?
न्यूज एजेंसी पीटीआई ने जनरल नरवणे की किताब के जिन अंशों को प्रकाशित किया था, उनमें पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर रेचिन ला पर्वत दर्रे पर चीन की सेना और टैंकों का जिक्र था। इन अंशों में बताया गया कि जब चीन की ओर से यह नापाक हरकत की जा रही थी, उस दौरान एमएम नरवणे ने चीन-भारत की सेना के बीच हुई तनाव की स्थिति पर रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रक्षा कर्मचारियों के प्रमुख से बातचीत की थी। 

ये भी पढ़ें: राहुल का सरकार पर वार: 'चीन हमारे सामने आ रहा था..तब कहां थी 56 इंच की छाती, राष्ट्रीय सुरक्षा अहम मुद्दा'

इन प्रकाशित अंशों में जनरल नरवणे के हवाले से लिखा गया था कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ फोन पर बातचीत के बाद दिमाग में कई अलग-अलग विचार दौड़ रहे थे। नरवणे ने लिखा कि मैंने रक्षा मंत्री को स्थिति की गंभीरता की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने कहा कि उस दौरान पीएम से भी बात की थी। उन्होंने कहा था कि यह पूरी तरह से एक सैन्य निर्णय है, 'जो उचित समझो वो करो'। 

साथ ही उन्होंने कहा कि मुझे अपनी इच्छानुसार कार्य करने की पूर्ण स्वतंत्रता के साथ एक कड़ा फैसला लेने की जिम्मेदारी दी गई थी। उस दिन को याद करते हुए उन्होंने लिखा कि इसके बाद मैंने एक गहरी सांस ली और कुछ मिनटों के लिए चुपचाप बैठा रहा। दीवार घड़ी की टिक-टिक को छोड़कर सब कुछ शांत था।

उन्होंने लिखा कि मैं आर्मी हाउस में था, एक दीवार पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का नक्शा था, दूसरी दीवार पर पूर्वी कमान का। वे अचिह्नित नक्शे थे, लेकिन जैसे ही मैंने उन्हें देखा, मैं प्रत्येक इकाई के स्थान की कल्पना कर सकता था। हम हर तरह से तैयार थे, लेकिन क्या मैं वास्तव में युद्ध शुरू करना चाहता था? ये सवाल मन में था। बता दें 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' में जनरल नरवणे उस रात की घटना को लेकर मन में आए विचारों का जिक्र किया। 
 

डोकलाम और लद्दाख के क्षेत्र में क्या फर्क, क्या राहुल भ्रमित हुए?
डोकलाम: यह सिक्किम के पास भारत, भूटान और चीन के बीच का एक ट्राई-जंक्शन है। यह एक सपाट और ऊंचा पठार है।
कैलाश रिज: यह पूर्वी लद्दाख में स्थित है। यह पैंगोंग सो झील के दक्षिण से शुरू होकर रेजांग ला और रेचिन ला जैसे दर्रों तक फैली पहाड़ियों की एक लाइन (रिज) है।

तो क्या राहुल कन्फ्यूज थे?
दरअसल, सदन में शुरुआत में ही 'गलवां घाटी' का जिक्र कर अपनी बात शुरू करने के बाद राहुल ने शोर-शराबे के बीच जब अपना भाषण आगे बढ़ाया तो उन्होंने कहा कि चीन के टैंक 'कैलाश रिज' पर हमारी पोजिशन से सिर्फ कुछ 100 मीटर ही दूर थे। इस दौरान राहुल ने नरवणे को 'सेना प्रमुख' भी बुलाया। 

ये भी पढ़ें: MM Naravane Memoir: क्या है वह किताब जिस पर लोकसभा में हुआ राजनाथ-शाह बनाम राहुल; क्यों नहीं प्रकाशित हुई?

सीधे शब्दों में समझें तो राहुल के अगले वक्तव्य में जिस कैलाश रिज का जिक्र किया गया, वह लद्दाख में है और 'डोकलाम' से अलग क्षेत्र है। इतना ही नहीं जनरल एमएम नरवणे डोकलाम तनाव के वक्त सेना प्रमुख भी नहीं थे। इस दौरान आर्मी चीफ के पद पर जनरल बिपिन रावत रहे थे। जनरल नरवणे जब सेना प्रमुख थे, तब भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में तीन अलग-अलग हिस्सों में संघर्ष हुआ था। इनमें कैलाश रिज का रेजांग ला एक हिस्सा था। 

अब जानें- डोकलाम और कैलाश रिज में भारत-चीन के बीच हुए टकराव में कितना फर्क?

1. विवाद का मुख्य कारण
डोकलाम: यहां विवाद भूटान और चीन के बीच है। भारत यहां भूटान के दावे का समर्थन करता है क्योंकि यह भारत की सुरक्षा (चिकन नेक कॉरिडोर) के लिए बहुत संवेदनशील है।

कैलाश रिज: यह विवाद सीधे भारत और चीन के बीच है। यह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के बिल्कुल पास है और लद्दाख सेक्टर का हिस्सा है। यहां दोनों देश सीमा को लेकर बातचीत कर रहे हैं।
विज्ञापन

2. टकराव के दौरान क्या हुआ
डोकलाम (2017): भारत-चीन और भूटान के ट्राई-जंक्शन पर पड़ने वाले डोकलाम पर चीन अपना दावा जताता रहा है। हालांकि, भारत इसे चीन का हिस्सा नहीं मानता और 2017 में उसकी निर्माण की कोशिशों को रोकने के लिए भारत ने क्षेत्र में सेना तैनात कर दी थी। दोनों देशों के बीच 73 दिनों तक चले तनाव के बाद चीन ने अपनी सेना को वापस बुला लिया था। भारतीय सैनिकों ने इस दौरान शारीरिक रूप से इलाके को ब्लॉक किया था।

कैलाश रिज (2020): भारत और चीन के बीच जून 2020 में गलवां घाटी में संघर्ष हुआ। इसमें दोनों देशों के सैनिकों की जान गई। इसके बाद चीन ने कई और क्षेत्रों में घुसपैठ की कोशिश की। बताया जाता है कि जून-जुलाई के दौरान चीनी सेना ने कैलाश रेंज के पास कब्जा जमाने के लिए अपने टैंक और सैन्य टुकड़ी भेजी। हालांकि, अगस्त 2020 में भारतीय सेना ने एक 'सरप्राइज ऑपरेशन' के तहत कैलाश रिज की ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया था। इससे भारतीय सेना चीनी सेना के कैंपों के ठीक ऊपर बैठ गई थी, जिससे चीन दबाव में आ गया।

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें