विरल आचार्य ने अर्जेंटीना का उदाहरण देकर विरोध किया था
पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने सरकार के कदम का विरोध करते समय अर्जेंटीना का उदाहरण दिया था। 6.6 बिलियन डॉलर सरकार को देने के दबाव में अर्जेंटीना सेंट्रल बैंक के गर्वनर मार्टिन रेडरेडो ने भी इस्तीफा दे दिया था। बाद में सरकार को फंड मिल गया। इसके कुछ महीने बाद ही अर्जेंटीना के बॉन्ड, करेंसी और स्टॉक मार्केट धराशायी हो गए।
तीन से पांच साल में मिलेगा पैसा
यह पैसा सरकार को आरबीआई से तीन से पांच साल के बीच में मिलेगा। कॉन्टिजेंसी फंड, करेंसी तथा गोल्ड रिवैल्यूएशन अकाउंट को मिलाकर आरबीआई के पास 9.2 लाख करोड़ रुपये का रिजर्व है, जो केंद्रीय बैंक के टोटल बैलेंस शीट साइज का 25 फीसदी है।
बैंकों को मिलेगी मदद
सरकार को इस फंड से बैंकों को मदद करने में आसानी होगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले ही सरकारी बैंकों में 70 हजार करोड़ रुपये की पूंजी डालने की घोषणा कर चुकी हैं, जिससे बाजार में 5 लाख करोड़ रुपये आने की उम्मीद है। सरकार ने बजट में रिजर्व बैंक के लिए 90 हजार करोड़ का डिविडेंड प्रस्तावित किया था जबकि पिछले वित्त वर्ष में आरबीआई ने डिविडेंड के तौर पर 68 हजार करोड़ रुपये चुकाए थे।
यह लोग थे समिति में शामिल
आरबीआई के पूर्व गवर्नर बिमल जालान के अलावा इस समिति में पूर्व डिप्टी गवर्नर राकेश मोहन, वित्त सचिव राजीव कुमार, केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर एन एस विश्वनाथन और सेंट्रल बोर्ड के दो सदस्य भरत दोशी और सुधीर मनकड़ भी शामिल हैं।