सत्ता पक्ष को थी इसकी आशंका
संसद में सरकार के प्रति अविश्वास का प्रस्ताव सांसद गौरव गोगोई ने रखा था। इस पर चर्चा के लिए लोकसभा अध्यक्ष ने 8,9 और 10 अगस्त का दिन निर्धारित किया गया। इससे पहले विपक्षी सांसद लगातार संसद में मणिपुर में हिंसा को लेकर नियम 267 के तहत चर्चा कराने और प्रधानमंत्री से वक्तव्य देने की मांग कर रहे थे, जबकि सरकार संक्षिप्त चर्चा के लिए तैयार थी। प्रधानमंत्री अपना वक्तव्य देने से बच रहे थे। तब राहुल गांधी के पास लोकसभा की सदस्यता नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राहुल गांधी की सजा पर रोक के बाद राहुल गांधी की सदस्यता सोमवार 07 अगस्त को बहाल हो गई। तब से सत्ता पक्ष को आशंका थी कि अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष की तरफ से चर्चा की शुरुआत कांग्रेस सांसद राहुल गांधी कर सकते हैं। राहुल चर्चा की शुरुआत करेंगे तो वह मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री को जरूर घेरेंगे। अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत के दौरान कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मौजूद थी। राहुल सदन में आए थे। सत्ता पक्ष के सांसद, मंत्री सभी राहुल गांधी का सामना करने, टोका-टोकी, हूटिंग के लिए तैयार थे। लेकिन जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सांसद गौरव गोगोई का नाम पुकारा तो सब हक्के-बक्के रह गए।
सत्तापक्ष राहुल पर इतना हमलावर क्यों?
इसकी बानगी मंगलवार को देखने में आई। जैसे ही लोकसभा अध्यक्ष ने गौरव गोगोई का नाम चर्चा की शुरुआत के लिए पुकारा, संसदीय कार्य राज्य मंत्री प्रल्हाद जोशी खड़े हो गए। उन्होंने जिक्र किया कि चर्चा की शुरुआत तो राहुल गांधी को करनी थी। खैर, गौरव ने चर्चा की शुरुआत की। पहले दिन सत्ता पक्ष के मंसूबे पूरे नहीं हो पाए। लेकिन राहुल गांधी ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दूसरे दिन अपनी बात रखते हुए बार-बार सत्ता पक्ष के सदस्यों से कहा कि वह डरें नहीं, घबराएं नहीं। क्योंकि आज वह अपनी चर्चा को दूसरी तरफ ले जा रहे हैं। राहुल गांधी ने कटाक्ष किया कि आज वह अडाणी पर हमला नहीं करेंगे। इसके बाद राहुल गांधी ने भाजपा के राष्ट्रवाद, राष्ट्र प्रेम और राष्ट्रभक्ति पर कटाक्ष के साथ हमला किया। भारत और भारत माता का जिक्र किया। मणिपुर के साथ जो हुआ उसे भारत माता से जोड़ा।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के सुझाव के बाद भी राहुल गांधी अपने वक्तव्य पर अड़े रहे। इस दौरान सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जमकर टोका-टाकी की, हूट करने का प्रयास किया। हल्ला और हंगामा भी किया। मानो राहुल पूरे सत्ता पक्ष के निशाने पर हैं। लेकिन राहुल गांधी नहीं रुके। उन्होंने मणिपुर में दो महिलाओं के उदाहरण के साथ अपनी बात पूरी की। प्रधानमंत्री पर मणिपुर न जाने और संवेदनहीन होने का आरोप लगाया। मणिपुर को दो हिस्सों में बांटने का आरोप लगाया, ये भी कहा कि सरकार मणिपुर को भारत का हिस्सा नहीं मानती, प्रधानमंत्री के मणिपुर के मुद्दे पर न बोलने का मुद्दा उठाया और सत्ता पक्ष के लोगों को देशद्रोही तक करार दिया।
प्रधानमंत्री पर राहुल गांधी ने बोला निजी हमला
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपना पक्ष रखते हुए प्रधानमंत्री पर निजी हमला बोला। अहंकार में डूबी सरकार की तरफ संकेत करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की तुलना रावण से की। उन्होंने कुंभकर्ण और मेघनाद का जिक्र करके इनकी तुलना अडाणी और अमित शाह से की। यह प्रधानमंत्री के साथ साथ अडाणी और गृहमंत्री पर सीधा हमला था। राहुल गांधी इस तरह के हमले पहले भी कर चुके हैं।
राहुल पर जरूरत से ज्यादा आक्रामक रहती हैं स्मृति ईरानी
कांग्रेस पार्टी के पूर्व केन्द्रीय मंत्री कहते हैं कि भाजपा में उस नेता को खास माना जाता है, जो बिना किसी कारण के भी राहुल गांधी के खिलाफ बोलता है। उनमें से एक केन्द्रीय मंत्री और अमेठी से सांसद स्मृति ईरानी हैं। भाजपा के सांसद निशिकांत दूबे भी राहुल गांधी के विरोध का एजेंडा लिए रहते हैं। स्मृति ईरानी ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल ही नहीं गांधी परिवार तक को चुनौती दे दी। जब राहुल गांधी ने कहा कि मणिपुर में हिन्दुस्तान की हत्या की गई है तो केन्द्रीय मंत्री किरण रिजिजू भी विरोध में खड़े हो गए। राहुल को लेकर एक और खुलासा कांग्रेस पार्टी के मीडिया एवं संचार विभाग प्रमुख ने किया। जयराम रमेश ने कहा कि राहुल गांधी सदन में 37 मिनट बोले जबकि उन्हें संसद टीवी के कैमरे पर 14 मिनट 37 सेकेंड ही दिखाया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद जब मणिपुर पर बोल रहे थे तो उन्हें अधिकांश समय तक संसद टीवी पर नहीं दिखाया गया। यहां तक कि संसद में राहुल गांधी के फ्लाइंग किस देने का मुद्दा भी स्मृति ईरानी ने ही बहुत जोरदार तरीके से उठाया। भाजपा आईटी सेल के अमित मालवीय ने राहुल गांधी के बोलते समय का एक वीडियो साझा करते हुए इसे राहुल गांधी की लफंगई करार दिया। हालांकि इस वीडियों में इस तरह का कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है और लोकसभा सचिवालय ने भी इस पर सफाई दी है। लोकसभा सचिवालय ने कहा कि यह वीडियो भाजपा महिला सांसदों की फ्लाइंग किस की शिकायत से संबंधित नहीं है।