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मानसून सत्र: संसद में राहुल गांधी ने किया 'अंधभक्त' शब्द का इस्तेमाल, हंगामे के बाद रिकॉर्ड से हटाया गया

Wed, 29 Jul 2026 01:27 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

लोकसभा में नेता-प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 'अंधभक्त' की परिभाषा बताते हुए सरकार और शिक्षा व्यवस्था पर निशाना साधा। उनके बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई और शब्द हटाने की मांग की। जानिए संसद में राहुल गांधी के बयान पर क्यों हुआ हंगामा।
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राहुल गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। इस दौरान उन्होंने एक छात्रा से हुई बातचीत का जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने 'छात्र, बेवकूफ और अंधभक्त' तीन श्रेणियां बताईं। राहुल गांधी ने कहा, मैंने कहा कि अंधभक्त की परिभाषा क्या है। उन्होंने कहा कि अंधभक्त वह है जो मान लेता है कि यह बड़ी छवि वाला बेवकूफ ही भगवान है। इसके बाद कुछ देर तक लोकसभा में हंगामा मच गया।  राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द को सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया है।
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राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने एक छात्रा से बातचीत का जिक्र किया, जिसने उन्हें तीन तरह के लोगों की कैटगरी बताई। राहुल गांधी ने कहा, पहली तरह के छात्र सच को गर्व से स्वीकार करते हैं।  मैंने पूछा कि दूसरे तरह के व्यक्ति के बारे में क्या? उसने कहा कि दूसरे तरह के व्यक्ति को एक छवि की जरूरत होती है। उसे एक छवि बनानी पड़ती है और क्योंकि वह छवि सच नहीं होती, तो एक बेवकूफ खुद को भगवान दिखाने की कोशिश कर रहा होता है, इसलिए उसे एक बड़ी छवि बनानी पड़ती है। मैंने उससे पूछा कि तीसरी श्रेणी कहां आती है? वह श्रेणी 'अंधभक्त' की है। उसने कहा, 'अंधभक्त' वह व्यक्ति होता है, जो पूरी तरह यकीन कर लेता है कि कोई दूसरा बेवकूफ भगवान है।

उन्होंने आगे कहा, तो तीन वर्ग के लोग हैं। एक वर्ग है विद्यार्थी का, जो विद्या का अर्थ है। बाकी दो वर्ग का मैं नाम नहीं लूंगा। छात्र इन दोनों से नहीं डरता। वह किसी पर हमलावर नहीं होता, क्योंकि वह जानता है कि उसका सच दूसरे के सच से अलग होगा। दूसरे वर्ग को हिंसा की जरूरत होती है, दबाव बनाने की जरूरत होती है। 
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संसदीय कार्य मंत्री ने हस्तक्षेप किया
इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए कहा, अगर राहुल गांधी ने असंसदीय शब्द का इस्तेमाल नहीं किया होता, तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होती। मेरा मानना है कि वह एक छात्र के नाम पर उस शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन असल में उस शब्द का इस्तेमाल वही कर रहे हैं। वह असंसदीय शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते। इसे सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए। 

वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा, मैं विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) द्वारा इस्तेमाल किए गए असंसदीय शब्द को कार्यवाही से हटा दिया जाए। मैं अपनी ओर के सभी सदस्यों से आग्रह करता हूं कि वे शांति बनाए रखें और उनकी बात सुनें। 

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, कई लोगों को लगता है कि छात्रों को पेपर लीक की वजह से गुस्सा आया है। हमारी शिक्षा व्यवस्था पहले ही क्रूर है। लाखों रुपये गरीबों से लिए जाते हैं। हर चीज प्राइवेटाइज है। पेपर लीक, एक परीक्षा में कुछ होता है, दूसरे में कुछ। एक में रिएग्जाम होता है, दूसरे में नहीं होता है। यह एक बेहद खराब व्यवस्था है। यह सिस्टम और इसकी आत्मा को कब्जे में कर लिया गया है। इसे आरएसएस ने कब्जे में किया है। राजनाथ सिंह जी ने कहा कि हम यूपीए नहीं है, हमारे मंत्री कभी इस्तीफा नहीं देते। वो सही कह रहे हैं। यहां जो हुआ, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, उससे कुछ हासिल नहीं हुआ। क्योंकि धर्मेंद्र प्रधान कभी नहीं चलाते। उसे आरएसएस चलाता है। मंत्री के दफ्तर में बैठा एक ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी)। छात्रों को कुछ बोलने नहीं दिया जाता। उन्हें अपने मन की चीज फॉलो नहीं करने दी जाती। उन्हें वह इतिहास पढ़ना पडता है, जो आरएसएस लाना चाहता है। हर यूनिवर्सिटी में आज आरएसएस से जुड़ा वाइस चांसलर है। धर्मेंद्र प्रधान सिर्फ एक व्यक्ति हैं, आपका असली दुश्मन आरएसएस है।

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'सड़कों पर जो हुआ वह आक्रोश, हिंसा या नफरत नहीं थी'
छात्रों के हालिया प्रदर्शनों पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, मैं देश के भविष्य की आवाज को देखकर बहुत उत्साहित और आश्वस्त हुआ। सड़कों पर जो हुआ, वह आक्रोश, हिंसा या नफरत नहीं थी। यह देश के युवाओं और आने वाली पीढ़ी की गहरी भावना की अभिव्यक्ति थी। मेरा मानना है कि सभी राजनीतिक दलों को इस भावना का सम्मान करना चाहिए, जिसमें मेरे भाजपा के मित्र भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा, मुझे पूरा भरोसा है कि अगर भाजपा के मेरे मित्र अपने बच्चों से पूछेंगे कि वे अपने भाई-बहनों के इस कदम के बारे में क्या सोचते हैं, तो उन्हें अपने बच्चों में भी समर्थन दिखाई देगा। जो कुछ हुआ, उसमें कुछ भी गलत नहीं है और हर भारतीय को इस पर गर्व होना चाहिए। 

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