लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने '16' नंबर को लेकर एक रहस्यमयी टिप्पणी कर हलचल मचा दी। उन्होंने इशारा किया कि इस संख्या में ही जवाब छिपा है, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नई बहस शुरू हो गई है। जानिए पूरा विश्लेषण...
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को एक ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने '16' नंबर को लेकर एक रहस्यमयी टिप्पणी करते हुए कहा 'हे भगवान यही तो वो नंबर है 16। जिसमें पूरा जवाब छिपा है।'
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क्या है '16' का रहस्य?
राहुल गांधी ने बताया कि कल जब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा में भाषण सुन रहे थे, तब उन्हें उनकी ऊर्जा कम लगी। उसी दौरान उन्होंने तारीख देखी 16 अप्रैल। इसी पर उन्होंने कहा कि 16 नंबर में ही इस पहेली का जवाब है। अगर आप किसी को कुछ समझ आया तो प्लीज मुझे सोशल मीडिया पर बताएं। आप जल्द ही इस नंबर के रहस्य को जान जाएंगे।
NDA गणित और 16 का कनेक्शन
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का इशारा सीधे एनडीए गठबंधन के अंदरूनी गणित की ओर हो सकता है। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा अपने दम पर बहुमत से पीछे रह गई थी और उसे सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इस संदर्भ में आंध्र प्रदेश की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) का महत्व बढ़ जाता है, जिसके पास 16 सांसद हैं और जिसका नेतृत्व चंद्रबाबू नायडू करते हैं। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं है कि राहुल गांधी का इशारा इसी तरफ था।
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TDP की भूमिका और दक्षिणी राज्यों की चिंता
हालांकि राहुल गांधी ने कोई विवरण नहीं दिया, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि वे इस ओर इशारा कर रहे थे कि टीडीपी (जो दक्षिण भारत का एक दल है) परिसीमन की योजनाओं पर मोदी सरकार के साथ सहमत नहीं हो सकता है। यह भी गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश के मंत्री और टीडीपी के नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष नारा लोकेश, जो नायडू के बेटे हैं, ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी को एनडीए की ओर से देश को आश्वासन देने के लिए धन्यवाद दिया था कि परिसीमन के माध्यम से किसी भी राज्य के साथ कोई अन्याय नहीं किया जाएगा।
परिसीमन बिल पर क्यों उठे सवाल?
राहुल गांधी का यह बयान उस समय आया है जब केंद्र सरकार लोकसभा सीटों के परिसीमन की तैयारी कर रही है। यह प्रक्रिया 2023 में पास महिला आरक्षण कानून से भी जुड़ी बताई जा रही है। दक्षिण भारत के कई दलों को डर है कि पुरानी जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होने से उनकी हिस्सेदारी कम हो सकती है। तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सहित कई दलों का कहना है कि यदि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ, तो दक्षिण राज्यों की लोकसभा हिस्सेदारी 24% से घटकर 20% तक आ सकती है।