‘वबा फैली हुई है हर तरफ, अभी माहौल मर जाने का नई...कहने वाले राहत इंदौरी दुनिया छोड़ गए। वबा महामारी को कहते हैं और राहत कोरोना संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती हुए थे। हिंदी-उर्दू मंचों से अपनी शायरी से महफिलें लूटने वाले राहत इंदौरी का दुनिया से जाना गंगा-जमुनी तहजीब के लिए बड़ी क्षति है।
राहत कहते थे, मैं मर जाऊं तो मेरी एक अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना।’ राहत ने एक शेर कहा, ‘ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था, मैं बच भी जाता तो इक रोज मरने वाला था।’
फिल्मों के गाने भी लिखे
मंचों के अलावा उन्होंने फिल्मों के लिए भी गीत लिखे। संजय दत्त की वापसी वाली फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस का टाइटल ट्रैक- ‘एम बोले तो मास्टर... गीत भी राहत की कलम से निकला। ‘करीब’ का गाना, चोरी चोरी जब नजरें मिलीं व नींद चुराई मेरी...भी लिखा।
‘बुलाती है मगर जाने का नहीं...’हुआ था वायरल
राहत साहब का शेर...बुलाती है मगर जाने का नहीं... कोरोना के चलते लॉकडाउन के बीच खूब वायरल हुआ। इस शेर पर सोशल डिस्टेंसिंग के लिए लोगों जागरूक करने वाले कई मीम्स बने।