मशहूर शायर और कवि राहत इंदौरी भले ही दुनिया को अलविदा कह गए हों लेकिन उनकी कविताएं, शायरियां और उनकेे किस्से उन्हें चाहने वालों के दिलों में हमेशा जिंदा रखेंगे। ‘बुलाती है मगर जाने का नई’ जैसी लिखीं लाइनें तो आजकल के युवाओं के बीच इस्तेमाल करने का फलसफा बन गई हैं। राहत सिर्फ शायरी और कविताएं ही नहीं करते थे, बल्कि उन्होंने हिंदी फिल्मों जैसे, खुद्दार, मुन्ना भाई एमबीबीएस, मिशन कश्मीर, करीब, इश्क, घातक जैसी फिल्मों के लिए गीत भी लिखे।
हे ईश्वर! बेहद दुखद! इतनी बेबाक जिंदगी और ऐसा तरंगित शब्द-सागर इतनी खामोशी से विदा लेगा, सोचा नहीं था। शायरी के मेरे सफर और काव्य-जीवन के ठहाकेदार किस्सों का एक बेहद जिंदादिल हमसफर हाथ छुड़ाकर चला गया। -कुमार विश्वास, प्रख्यात कवि