यह भी देखा जा रहा है कि अपना निजी हित साधने के लिए जूनियर्स कई बार झूठे केस भी दर्ज कराते हैं। ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या सही पीड़ितों को न्याय दिलाने में बाधा बन रहे हैं।
रैगिंग में शामिल मामले
किसी भी तरह का शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न, मानवीय गरिमा को भंग करने वाला कोई काम, लिख-बोलकर किसी का अपमान करना या चिढ़ाना, डराना या धमकी देना, घर में बंद करना आदि कार्य को रैगिंग माना जाता है।
ऐसे दर्ज कराएं शिकायत
रैगिंग की घटना होने पर शिकायत दर्ज कराए जाने के लिए मई 2017 को मानव संसाधन मंत्रालय और यूजीसी ने एंटी रैगिंग मोबाइल ऐप को जारी किया था। इससे भी पीड़ित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा रैगिंग होने पर संबंधित संस्थान के प्रमुख के पास लिखित में शिकायत दर्ज कराएं। फिर भी कोई कार्यवाई न हो तो यूजीसी के एंटी रैगिंग सेल से लिखित या फोन पर संपर्क कर सकते हैं। इसका टोल फ्री नंबर 18001805522 है।
संस्थान ईमानदारी से नहीं करते कार्रवाई
यह भी देखा जाता है कि रैगिंग की घटना होने पर संस्थान अपनी साख बचाने के लिए कार्रवाई के नाम पर लीपापोती शुरू कर देते हैं। कई बार तो मामले को दबाने की कोशिश भी की जाती है। हालांकि हर मामले में ऐसा नहीं होता है।