भारत को मिलने वाले राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे राफेल विमानों से भी बेहतर होंगे। इसकी वजह यह है कि इसे बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने इस विमान में भारत की जरूरतों के हिसाब से कई बदलाव किए हैं। राफेल को हरियाणा के सरसावा और पश्चिम बंगाल के हाशिमआरा एयरबेसों पर तैनात किया जाएगा।
विमान में भारत की जरूरत के हिसाब से इस्राइल निर्मित हेलमेट पर लगे डिस्प्ले, राडार वार्निंग रिसीवर, लो बैंड जैमर, 10 घंटे की फ्लाइट डाटा रिकॉर्डिंग, इंफ्रा रेड सर्च एंड ट्रैकिंग जैसे उपकरण लगाए जाएंगे। साथ ही लेह जैसी बर्फीली जगहों पर भी स्टार्ट करने की सुविधा होगी।
इस विमान में लगी मेटियोर मिसाइल से भारत की बियांड विजुअल रेंज (बीवीआर) मारक क्षमता 150 किमी से ज्यादा हो जाएगी। कारगिल युद्ध के समय भारत ने 50 किमी रेंज की बीवीआर का इस्तेमाल किया था। जबकि तब पाकिस्तान के पास ऐसा कुछ नहीं था। बाद में पाकिस्तान ने 80 किमी रेंज की बीवीआर क्षमता हासिल कर ली।
सुखोई से भी बेहतर है राफेल
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वायुसेना के पास अभी सिर्फ 34 स्क्वाड्रन
भारतीय वायुसेना में 44 स्क्वाड्रन की जरूरत है। जबकि इस समय उसके पास सिर्फ 34 स्क्वाड्रन ही हैं। भारत को मिग 21 को बदलने के लिए 2020 तक सौ नए फाइटर जेट चाहिए। मालूम हो कि शुरू में 126 लड़ाकू विमान खरीदने की बात चल रही थी, लेकिन अंत में 36 विमान खरीदने पर सहमति बनी।
सुखोई से भी बेहतर है राफेल
राफेल की सर्च रेंज 780 किमी से 1055 किमी तक होगी। यानी यह ज्यादा दूर तक नजर रख सकता है। अब तक भारत के पास मौजूद सबसे ताकतवर विमान सुखोई 30 एमकेआई की सर्च रेंज 400-450 किमी है। सूत्रों ने कहा कि राफेल रोजाना पांच मिशन कर सकता है, जबकि अन्य विमान तीन मिशन ही कर सकते हैं। जैसे सुखोई 30 का इंजन बदलने में आठ घंटे लगते हैं, जबकि राफेल में यह काम सिर्फ 30 मिनट में हो सकता है।
भारत ने बचाए 328 मिलियन यूरो
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भारत ने बचाए 328 मिलियन यूरो
भारत ने इस विमान सौदे में फ्रांस से कड़ा मोल भाव कर लगभग 328 मिलियन यूरो की बचत की है। फ्रांस ने शुरू में 8.6 अरब यूरो में सौदे की पेशकश की थी, लेकिन भारत ने अब 7.87 अरब यूरो में डील तय करा ली। यूपीए सरकार के समय में हुए सौदे को खारिज कर मोदी सरकार ने नए सिरे से यह सौदा किया। इसके अलावा इसमें 50 फीसदी का ऑफसेट क्लॉज भी रखा गया है, जिसके तहत भारतीय उद्योगों को करीब तीन अरब यूरो का कारोबार मिलेगा।
मेक इन इंडिया का हिस्सा बनने को तैयार : दसॉल्ट सीईओ
फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक टैपियर ने कहा है कि वह मेक इन इंडिया का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारत बड़ा ऑर्डर देता है तो वह भारत में विमान बनाने के लिए भी तैयार हैं।