कैग को सौंपे ज्ञापन में कांग्रेस ने कहा कि हमारा यह स्पष्ट रूप से मानना है कि इस पूरी साजिश, भ्रष्टाचार, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने और सांठगांठ वाले पूंजीवाद के सभी पहलुओं का खुलासा संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच से हो सकता है।
कांग्रेस ने कहा कि कैग के पास संवैधानिक अधिकार है और हर दस्तावेज की छानबीन करने को अधिकृत है, ऐसे में यह आशा की जाती है कि वह फोरेंसिक ऑडिट करेगा। पार्टी ने कहा कि हम कैग से आग्रह करते हैं कि वह सभी तथ्यों को रिकॉर्ड पर लाएं ताकि संसद राफेल घोटाले में जवाबदेही तय कर सके।
24 सितंबर को सीवीसी से मिली थी कांग्रेस
गत 24 सितंबर को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राफेल मामले में केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) के वी. चौधरी से मुलाकात की थी और कहा कि यह रक्षा क्षेत्र का सबसे बड़ा घोटाला है और इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर सारे रिकॉर्ड की छानबीन की जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि इस विमान सौदे से जुड़े सारे कागजात और फाइलें जब्त की जाएं क्योंकि इनको नष्ट किए जाने की आशंका है।
दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी पिछले कई महीनों से यह आरोप लगाते आ रहे हैं कि मोदी सरकार ने फ्रांस की कंपनी दसाल्ट से 36 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद का जो सौदा किया है, उसका मूल्य पूर्ववर्ती यूपीए सरकार में विमानों की दर को लेकर बनी सहमति की तुलना में बहुत अधिक है। इससे सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
पार्टी ने यह भी दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौदे को बदलवाया और एचएएल से ठेका लेकर रिलायंस डिफेंस को दिया गया।