राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार को क्लिनचिट मिल जाने के बाद जहां भाजपा और सरकार में जोश भर दिया है वहीं कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियां बैकफुट पर नजर आ रही हैं। भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से माफी की मांग की है वहीं कांग्रेस संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की अपनी पुरानी मांग पर अड़ी हुई है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला उस समय आया जब संसद की कार्यवाही शुरू हो रही थी। जैसे ही 'सुप्रीम' फैसले की जानकारी सरकार को मिली उसके बाद सरकार के मंत्री और भाजपा सांसद राहुल गांधी पर हमला बोल दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत बैठक बुलाई और करीब 20 मिनट तक रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन से चर्चा की।
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'यह मामला शुरुआत से ही एकदम साफ-सुथरा था और हम लगातार कह रहे थे कि कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। इन्हें राजनीतिक फायदा लेने के लिए लगाया गया है।' भाजपा प्रमुख अमित शाह ने कहा कि सच की हमेशा जीत होती है। राफेद सौदे पर न्यायालय का फैसला राहुल गांधी द्वारा चलाए जा रहे दुष्प्रचार अभियान का पर्दाफाश करता है।
वहीं, कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, कांग्रेस जेपीसी जांच की मांग पर अड़ी हुई है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरेजवाला ने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी कहा था कि न्यायालय राफेल मामले पर फैसला नहीं कर सकता, सिर्फ जेपीसी जांच में सभी फाइलों और नोटिंग की जांच करके फैसला किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "सरकार ने राफेल सौदे के मामले में उच्चतम न्यायालय को एक-तरफा और आधी-अधूरी जानकारी दी।"
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां इस मामले की जांच संयुक्त ससंदीय दल से करवाना चाहती है। उन्होंने कहा, 'उच्चतम न्यायालय ने वह कहा जो उसे सही लगा लेकिन राजनीतिक पार्टियां इस मामले की जांच जेपीसी से करवाने की मांग कर रही हैं।'
वकील प्रशांत भूषण ने न्यायालय के फैसले पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, 'मेरी राय में उच्चतम न्यायालय का आदेश पूरी तरह से गलत है। यह अभियान निश्चित रूप से कमजोर नहीं होगा। हम इस बात का निर्णय करेंगे कि क्या हम इस मसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकते हैं या नहीं।'
वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा का कहना है कि उच्चतम न्यायालय के फैसले पर भाजपा को खुश होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री और भाजपा सरकार के लिए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर खुश होने का कोई कारण नहीं है जो स्वयं विरोधाभासी हैं। माननीय न्यायालय का कहना है कि उसके लिए राफेल के विवरण में जाना सही नहीं है।'
शर्मा ने आगे कहा, 'उच्चतम न्यायालय ने किसी महत्वपूर्ण पहलू पर कोई टिप्पणी नहीं की। हम लगातार इस सौदे पर जेपीसी की मांग कर रहे हैं। जेपीसी के पास सभी दस्तावेजों को तलब करने का अधिकार है।'