दरअसल, डैसो एविएशन के साथ जिन चीजों पर सहमति नहीं बनी, उनमें सबसे प्रमुख था तकनीकी ट्रांसफर। इसके अलावा डैसो एविएशन भारत में बनने वाले राफेल विमानों की गुणवत्ता की जिम्मेदारी लेने को भी तैयार नहीं थी। हालांकि फिर भी इस मुद्दे पर दो साल खींचतान हुई, लेकिन फिर भी सहमति नहीं बन सकी।
मोदी सरकार के आने के बाद फिर खुल मामला
साल 2014 में यूपीए की सरकार चली गई और भाजपा की सरकार सत्ता में आ गई, जिसके बाद साल 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस से 36 लड़ाकू विमानों की खरीद की योजना बनाई। इसके बाद साल 2016 में भारत और फ्रांस के बीच 59 हजार करोड़ के सौदे पर करार हो गया। लेकिन उसके बाद कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाने लगी कि विमानों की खरीद के लिए ऊंची कीमतें लगाई गई हैं, इसमें रिलायंस को भागीदारी क्यों बनाया गया?
कांग्रेस के ये हैं सवाल
कांग्रेस का कहना है कि यूपीए के राफेल समझौते में एक विमान की कीमत 526 करोड़ रुपये थी जो मोदी सरकार ने 1570 करोड़ रुपये में लगभग तीन गुनी कीमत के साथ लिया जा रहा है, इस नुकसान का जिम्मेदार कौन है?
कांग्रेस का यह भी कहना है कि साल 2016 में फ्रांस में हुए समझौते में सुरक्षा पर बनी कैबिनेट कमेटी की मंजूरी नहीं ली गई। इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, क्या इस पर भ्रष्टाचार का केस नहीं बनता है?
कांग्रेस का तीसरा सवाल है कि नवंबर साल 2017 में रक्षा मंत्री ने कहा था कि 36 राफेल विमान इमरजेंसी के लिए तत्काल रूप से लिए गये। अगर ऐसा था तो समझौते के इतने समय बाद भी एक भी राफेल विमान क्यों नहीं मिला है?
इस मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी, जिसमें अदालत ने साफ कह दिया है कि राफेल की कीमतों पर बहस नहीं होगी। जब जरूरत महसूस होगी, तभी इसका खुलासा किया जाएगा। हालांकि अब आगे भी ऐसा लगता नहीं है कि राफेल की कीमतों के खुलासे पर जोर दिया जाएगा। हालांकि इसमें यह सबसे बड़ा सवाल उभरकर सामने आ रहा है कि अगर ऑफसेट पार्टनर के तौर पर अंबानी और बिचौलियों को फायदा, जैसी अनियमितताओं की जांच के आदेश दिए जाते हैं तो मामले की जांच कौन करेगा, क्योंकि सीबीआई तो खुद सवालों के घेरे में है।
2019 में भारत आ जाएगा राफेल
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सितंबर 2019 में पहला राफेल भारत पहुंच जाएगा। हालांकि सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के प्रोफेसर भरत कर्नाड का कहना है कि वायुसेना के पास तब भी विमानों की कमी बनी रहेगी, क्योंकि वायुसेना को फिलहाल ज्यादा विमानों की जरूरत है।