चीन के साथ चल रहे सीमा गतिरोध के बीच भारत और फ्रांस के राफेल विमान अगले महीने अपना शक्ति प्रदर्शन करेंगे। यह शक्ति प्रदर्शन स्काईरोज कोडनेम वाले वारगेम्स के तहत जोधपुर में अगले साल जनवरी के तीसरे सप्ताह में किया जाएगा। इस संयुक्त युद्धाभ्यास को चीन के साथ तनाव के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
चार महीने पहले अगस्त में राफेल विमानों के भारतीय वायुसेना (आईएएफ) की सेवा में शामिल होने के बाद यह पहला मौका भी होगा, जब आईएएफ किसी प्रमुख वारगेम में इन विमानों के साथ हिस्सेदारी करेगी। सरकारी सूत्रों ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, फ्रांसीसी वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमान स्काईरोज वारगेम्स के लिए जोधपुर आएंगे। ये विमान भारतीय वायुसेना की 17वीं स्क्वाड्रन के राफेल विमानों और सुखोई एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों के साथ उड़ान भरते दिखाई देंगे।
सूत्रों ने कहा, स्काईरोज वारगेम्स दोनों देशों के बीच एक दशक से भी अधिक समय से नियमित तौर पर आयोजित हो रही गरुड़ अभ्यास श्रृंखला से अलग हैं। इस दौरान दोनों पक्षों के लड़ाकू विमानों की तरफ से कुछ जटिल दांव-पेंच देखने को मिलेंगे। भारत ने फ्रांसीसी वायुसेना के साथ आखिरी बार प्रमुख युद्धाभ्यास में जुलाई, 2019 में हिस्सेदारी की थी, जहां भारतीय सुखोई विमानों ने फ्रांसीसी राफेल विमानों के साथ उड़ान भरी थी।
आईएएफ की क्षमताओं को बेहतर करने के लिए फ्रांस लगातार भारत की मदद कर रहा है। भारत ने फ्रांस के साथ 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए करीब 60 हजार करोड़ रुपये का सौदा किया है। इस सौदे के तहत अंतिम विमान भारत को साल 2022 के अंत में मिलने की उम्मीद है।
एकीकृत ढंग से होगा राफेल-सुखोई का उपयोग
आईएएफ राफेल और सुखोई 30एस विमानों को एकीकृत ढंग से इस्तेमाल करने की योजना भी बना रही है। इसके लिए वायुसेना की तरफ से पहले ही कई तरह के निर्देश दिए जा चुके हैं। राफेल और सुखोई-30एस विमानों को वायुसेना ने पूर्वी लद्दाख में तैनात किया है। वायु सेना ने ऐसा चीन की वायु सेना से मुकाबला करने के लिए किया है, जिसके लड़ाकू विमान लगातार भारत के नजदीकी एयर बेस से उड़ानें भरते रहते हैं।