कर्नाटक में येदियुरप्पा सरकार के पतन के बाद कांग्रेस-जनता दल सेक्युलर गठबंधन सरकार अगर सही तरीके से चल गई तो 2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठजोड़ की ही तरह कर्नाटक में भी भाजपा के लिए मुश्किल पैदा हो जाएगी। तब राज्य की 28 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस-जनता दल-एस गठबंधन की ताकत बेहद बढ़ जायेगी, क्योंकि विधान सभा चुनावों में भाजपा को मिले 37% मतों के मुकाबले कांग्रेस-जदएस गठबंधन के कुल 57 फीसदी वोट खासे भारी हैं।
कर्नाटक के घटनाक्रम से लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन की संभावना बढ़ गई है। साथ ही केंद्रीय राजनीति में पूर्व पीम एचडी देवगौड़ा की भूमिका भी बढ़ जाएगी। साथ ही इसी साल होने वाले राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधान सभा चुनावों में कांग्रेस का मनोबल भी बढ़ेगा। इसका फायदा उसे चुनावों में मिल सकता है।