कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने किराना स्टोर्स को निशाना बनाने वाले क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स द्वारा नियामक उल्लंघनों को उजागर करने के लिए बुधवार को एक श्वेत पत्र जारी किया है। कैट ने अपने श्वेत पत्र में क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स जैसे ब्लिंकिट, इंस्टामार्ट, जेप्टो व स्विगी आदि के उन कार्यों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है, जो भारत की खुदरा अर्थव्यवस्था की नींव को कमजोर कर रहे हैं। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक के सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने इन प्लेटफार्म्स पर विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) का दुरुपयोग कर आपूर्तिकर्ताओं पर नियंत्रण, इन्वेंटरी पर प्रभुत्व, और अनुचित मूल्य निर्धारण के लिए इस फंड का उपयोग करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ये ऐसी रणनीतियां हैं, जो एक असमान बाजार बनाती हैं। यही वजह है कि इनके समक्ष 3 करोड़ किराना स्टोर्स का टिक पाना लगभग असंभव हो गया है।
बतौर खंडेलवाल, ये प्लेटफार्म छोटे खुदरा विक्रेताओं को बाजार से बाहर धकेलने का काम कर रहे हैं। श्वेत पत्र में यह विस्तार से बताया गया है कि कैसे क्विक कंपनियां, एफडीआई नीति और भारत के प्रतिस्पर्धा अधिनियम का उल्लंघन कर रही हैं। इन उल्लंघनों के साथ-साथ पारदर्शिता की कमी, न केवल छोटे व्यवसायों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि संपूर्ण खुदरा पारिस्थितिकी तंत्र को भी विकृत करती है। कैट ने नियामक निकायों से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया, ताकि क्विक प्लेटफॉर्म निष्पक्ष प्रथाओं का पालन करें। छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा की जा सके। खंडेलवाल ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की हाल की टिप्पणियों का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने क्विक कॉमर्स प्लेटफार्म पर इसी प्रकार की चिंताओं को व्यक्त किया था। गोयल ने कहा था कि ये अनुचित व्यापारिक कार्य किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
स्थानीय किराना स्टोर्स के साथ क्विक प्लेटफॉर्म्स को जोड़ने पर जोर दिया जाए। यह व्यापारिक समुदाय के लिए अत्यधिक स्वागत योग्य कदम है। एफडीआई नीति का उल्लंघन और एफडीआई का दुरुपयोग करके अनुचित मूल्य निर्धारण का फंडिंग, श्वेत पत्र से यह खुलासा हुआ है। क्विक प्लेटफॉर्म्स, जो ₹54,000 करोड़ से अधिक की एफडीआई से समर्थित हैं, ने इस निवेश का उपयोग न तो बुनियादी ढांचा निर्माण में किया और न ही दीर्घकालिक परिसंपत्तियों में। इसके बजाए, वे इस एफडीआई का उपयोग संचालन में होने वाले घाटों को कवर करने, आपूर्ति श्रृंखला पर नियंत्रण रखने और कुछ चुनिंदा विक्रेताओं के माध्यम से अनुचित छूट की पेशकश के लिए कर रहे हैं। इस प्रकार के कार्यों ने क्विक प्लेटफॉर्म्स को वह बाजार हिस्सा हासिल करने में मदद की है, जो पहले किराना स्टोर्स के पास था। कैट के महामंत्री ने कहा, इससे कई छोटे खुदरा विक्रेताओं के लिए अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है।
श्वेत पत्र में क्विक प्लेटफॉर्म्स द्वारा किए जा रहे विभिन्न नियामक उल्लंघनों का उल्लेख किया गया है। क्विक प्लेटफॉर्म्स चुनिंदा विक्रेताओं के साथ विशेष सौदे कर स्वतंत्र खुदरा विक्रेताओं के लिए प्रतिस्पर्धा के अवसरों को सीमित करते हैं। एफडीआई द्वारा वित्त पोषित गहरी छूट से, किराना स्टोर्स बाजार से बाहर हो रहे हैं। इससे प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। एफडीआई और प्रतिस्पर्धा विरोधी प्रथाओं के उल्लंघन को छिपाने के लिए, क्विक प्लेटफॉर्म्स विक्रेताओं की जानकारी छुपाते हैं। इसके चलते उपभोक्ताओं को जानकारी पूर्ण चुनाव करने में कठिनाई होती है। क्विक कंपनियां, चुने हुए विक्रेताओं के माध्यम से इन्वेंटरी का अप्रत्यक्ष नियंत्रण रखती हैं, जो भारत की एफडीआई नीति के तहत निषिद्ध है। इस वजह से फेमा दिशानिर्देशों का उल्लंघन होता है। श्वेत पत्र में यह भी कहा गया है कि क्विक प्लेटफॉर्म्स प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 का भी उल्लंघन कर रहे हैं। इससे गलत परंपरा विकसित होती है।
इनके विशेष विक्रेताओं के साथ किए गए समझौतों ने बाजार में प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता विकल्पों को सीमित कर दिया है। क्विक प्लेटफॉर्म्स आपूर्ति, मूल्य निर्धारण और वितरण पर नियंत्रण रखने के लिए ऊर्ध्वाधर समझौतों का उपयोग करते हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। ये प्लेटफॉर्म्स अपने प्रमुख बाजार स्थिति का दुरुपयोग करते हुए कीमतों में हेरफेर और इन्वेंटरी नियंत्रण का सहारा लेते हैं। इससे स्वतंत्र विक्रेताओं को नुकसान होता है। कैट ने क्विक प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदार ठहराने के लिए तत्काल नियामक हस्तक्षेप की मांग की है। विदेशी पूंजी द्वारा संचालित इन प्लेटफॉर्म्स की अनियंत्रित वृद्धि भारत के छोटे खुदरा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है। एफडीआई नीति 2020 और फेमा अधिनियम 1999 का उल्लंघन इन क्विक प्लेटफॉर्म्स के संचालन की मुख्य समस्याएं हैं, जो इन प्लेटफॉर्म्स को अस्थिर अनुचित मूल्य निर्धारण के लिए एफडीआई का उपयोग करने देती हैं। उनका परिसंपत्तियों के निर्माण या बुनियादी ढांचे के विकास में कोई योगदान नहीं होता।
श्वेत पत्र ने निष्कर्ष निकाला है कि क्विक प्लेटफॉर्म्स खुलेआम एफडीआई नीति का उल्लंघन कर रहे हैं, नियामक दिशानिर्देशों की अवहेलना कर रहे हैं। प्रतिस्पर्धा विरोधी रणनीतियों में लिप्त हैं, जो किराना स्टोर्स और खुदरा पारिस्थितिकी तंत्र के भविष्य को खतरे में डालते हैं। कैट ने सरकार से उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियमों, ई-कॉमर्स नीति के माध्यम से सख्त निगरानी लागू करने और इन क्विक प्लेटफॉर्म्स को अधिक जवाबदेही के साथ संचालित करने का आह्वान किया है, ताकि भारत के खुदरा क्षेत्र की अखंडता बनी रहे।