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हर राज्य में कांग्रेस तलाश रही कंधा, अकेले चुनाव लड़ने की कुव्वत पर उठने लगे सवाल

Sun, 30 Apr 2017 07:58 AM IST
धीरज कनोजिया/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो - फोटो : Getty images
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अकेले दम पर चुनाव लड़ने की कांग्रेस की कुव्वत पर सवाल उठने लगे हैं। जिन राज्यों में कांग्रेस का खुद का मजबूत संगठन है और जहां अपने बलबूते भाजपा से मुकाबला करने का दम रखती है, वहां भी कई छोटे और क्षेत्रीय दल कांग्रेस पर गठबंधन का दबाव बना रहे हैं। इन दलों के दबाव में कांग्रेस हाईकमान गठबंधन के विकल्पों पर सोचने लगा है। कर्नाटक में जनता दल सेक्यूलर और गुजरात में एनसीपी और जनता दल युनाइटेड कांग्रेस पर गठबंधन के लिए दबाव बना रहे हैं। इन दलों का कहना है कि यदि कांग्रेस अकेले लड़ी तो यूपी और दिल्ली में एमसीडी चुनाव जैसा हाल होगा।
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एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल और जदयू नेता के सी त्यागी ने हाल ही में गुजरात दौरा कर कांग्रेस के कई नेताओं से गठबंधन पर बात की। दिल्ली में भी वे कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं से संपर्क में हैं। वहीं कर्नाटक में हुए हाल के उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के लिए भले ही मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को श्रेय दिया जा रहा है, लेकिन एच डी देवेगौड़ा की पार्टी जद यू सेक्यूलर ने उपचुनाव में अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया था। जिससे वोटों का विभाजन नहीं हुआ और इसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिला। 

मगर इसके बावजूद आगामी कर्नाटक चुनाव में मुख्यमंत्री अकेले दम पर लड़ने को लेकर विचार कर रहे हैं। हालांकि उनकी पार्टी में कई वरिष्ठ नेता उनके इस रुख का विरोध कर रहे हैं। देवेगौड़ा और उनके बेटे कुमारस्वामी कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के इच्छुक हैं। 
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उधर, गुजरात में भी कांग्रेस के सामने भाजपा को हराने की चुनौती है। जदयू नेता के सी त्यागी ने कहा कि सेक्यूलर दलों को एकजुट रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी कांग्रेस की है। कांग्रेस संसद के अंदर और राष्ट्रपति चुनाव में तो क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल चाहती है मगर राज्यों के चुनाव में इससे परहेज करती है। त्यागी कांग्रेस को अपने इस रुख को बदलने की नसीहत देते हैं। दोनों राज्यों में कांग्रेस में गठबंधन को लेकर विचार चल रहा है। 
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