सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य के पुलिस चीफ द्वारा आपराधिक मामलों की जांच के लिए उच्च अधिकारी की नियुक्ति पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।
न्यायमूर्ति रंजन गोगई और न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी पंत की पीठ ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा-36 राज्य के पुलिस प्रमुख को जांच के लिए किसी उच्च अधिकारी को नियुक्त करने पर रोक नहीं लगाता है।
पीठ ने कहा कि अगर पुलिस प्रमुख को लगता है कि किसी मामले की जांच के लिए के किसी योग्य उच्च अधिकारी को नियुक्त किया जाना चाहिए, तो वह कर सकता है। भले ही उस अधिकारी की नियुक्ति उसके क्षेत्राधिकार के बाहर के लिए क्यों न की गई हो।
पीठ ने कहा कि धारा-36 पुलिस महानिदेशक को अपने संतुष्टि के लिए ऐसा कर सकता है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने केरल हाईकोर्ट के फैसले का पलट दिया है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।
राज्य पुलिस ने वर्ष 2012 में पारिवारिक विवाद से संबंधित दो मामलों की जांच के लिए सहायक पुलिस आयुक्त को नियुक्त किया था। लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस प्रमुख किसी अधिकारी को उसके स्थानीय क्षेत्राधिकार केबाहर जांच केकाम के लिए नियुक्त नहीं कर सकता।
लेकिन शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के इस फैसले को दरकिनार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर नियुक्ति गलत इरादे से की गई हो तो उसे चुनौती दी जा सकती है लेकिन क्षेत्राधिकार को लेकर सवाल नहीं उठाए जा सकते।