कांग्रेस अगस्त में प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करते समय विभिषणों का रखेगी ध्यान
बुरे दिन से गुजर रही कांग्रेस राज्यसभा चुनाव केबाद और परेशान हो गई है। हरियाणा में गुटों में बंटी कांग्रेस में अदरूनी उठापटक तय है। वहीं यूपी में अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ वोट करने वालों के बारे में कहा जा रहा है कि वह कभी भी कांग्रेस को अलविदा कहकर दूसरे दल का हाथ थाम सकते हैं। जिस कारण दोनों ही जगह कांग्रेस में राजनीतिक तूफान आने के खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता। कांग्रेस हाईकमान इस मुद्दे को लेकर गंभीर है। दोनों राज्य की इकाईयों से जवाब तलब करने की तैयारी है। सोमवार को नोटिस जारी हो सकते हैं। पूर्व सीएम हुड्डा ने हरियाणा में वोट रद्द होने को भाजपा की साजिश करार दिया और चुनाव आयोग से शिकायत करने की बात कही है।
हरियाणा में कांग्रेस गुटबंदी में फंसी हुई है। नवीन जिंदल की मंशा कतई नहीं थी कि भाजपा समर्थित सुभाष चंद्रा की कांग्रेस मदद करे। उन्होंने हाईकमान से मिलकर इस भावना से अवगत भी कराया। दरअसल, नवीन जिंदल और सुभाष चंद्रा के बीच 36 का आकंड़ा जगजाहिर है। दोनों केबीच कानूनी लड़ाई अभी चल रही है। जबकि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी विधायक इनेलो समर्थित प्रत्याशी वकील आरके आनंद के पक्ष में वोट करने के लिए तैयार नहीं थे। कांग्रेस के 14 विधायकों केवोट रद्द हुए है। माना जा रहा है कि ये सभी हुड्डा समर्थित हैं। इससे यह संदेश जा रहा है कि भाजपा समर्थित सुभाष चंद्रा को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा जानबूछकर किया गया है।
विरोधी अब भाजपा के साथ कांग्रेस के खड़े होने की तोहमत लगाकर इसे मुद्दा बनाकर पार्टी को घेरेंगे। कयास लगाए जा रहे है कि गुटों में बंटी हरियाणा कांग्रेस में अब खींचतान और बढ़ेगी। इस भीतरी जंग में पार्टी के टूट तक पुहंचने से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
यूपी में खोए वजूद को पाने की जुस्तजू में जुटी कांग्रेस को उसकेकई विधायकों ने एमएलसी और राज्यसभा चुनाव में धराशाही करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। इन विधायकों ने विरोधी दलों केप्रत्याशियों के पक्ष में वोटिंग की। पार्टी हाईकमान अब पता कर रहा है कि पार्टी विरोधी विधायक कौन कौन हैं। दरअसल, एमएलसी चुनाव में इस बात का पता नहीं चलता है कि किस विधायक ने किस पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया। पार्टी के घोषित प्रत्याशी के पक्ष में पड़े मतों के आधार पर अंदाजा लगाया जाता है। कांग्रेस के सामने दिक्कत है यह कि उसने हर जिले से 2017 केचुनाव के लिए संभावित प्रत्याशियों का पैनल मांगा है। इस पैनल के आधार पर अगस्त में पहली सूची जारी की जाएगी। हाईकमान चाहता है कि पार्टी विरोधी काम करने वाले या मानसिकता रखने वाले नेताओं के नामों पर टिकट देने की लिए विचार ही नहीं कि या जाए।