राजधानी दिल्ली में इस समय तब्लीगी जमात के लगभग दो हजार लोग विभिन्न क्वारंटीन सेंटरों में रह रहे हैं। उनके क्वारंटीन रहने की सामान्य अवधि (14 दिन) बहुत पहले ही समाप्त हो चुकी है, लेकिन इसके बाद भी अभी तक उन्हें छुट्टी नहीं दी गई है। सरकार के इस रुख को लेकर तब्लीगी जमात के लोगों में नाराजगी है।
हालांकि, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि तब्लीगी जमात के सभी लोगों को उनके गृहराज्यों में भेजने की व्यवस्था की जा रही है और जल्दी ही सबको उनके घरों को भेज दिया जाएगा। हालांकि अभी तक लगभग 1200 जमातियों को उनके गृहराज्यों में भेजा जा चुका है।
आज भी गई विशेष ट्रेन
बता दें कि तब्लीगी जमात के मरकज कार्यक्रम में पूरे देश से लोग आए थे। इनमें तमिलनाडु से भारी संख्या में आए लोग शामिल हुए थे। शनिवार 16 मई को 680 जमातियों को लेकर एक विशेष ट्रेन तमिलनाडु के लिए रवाना हुई है। इन्हें उसी समय क्वारंटीन कर दिया गया था जब कोरोना संक्रमण के मामले में तब्लीगी जमात का नाम प्रमुखता से सामने आया था। आरोप है कि तब से अब तक लगभग 45 दिन क्वारंटीन सेंटर में रहने के बाद भी इन्हें घर जाने की इजाजत नहीं दी गई है। ये जमाती दिल्ली के सुल्तानपुरी और नरेला के क्वारंटीन सेंटर में रह रहे थे।
अब तक 1200 भेजे गए
दो दिन पूर्व एक विशेष ट्रेन के जरिए लगभग 150 जमातियों को जम्मू-कश्मीर भेजा गया है। ये लोग लगभग 40 दिन से बवाना और नरेला क्वारंटीन सेंटर में रह रहे थे। जम्मू-कश्मीर प्रशासन और दिल्ली सरकार में सहमति बन जाने के बाद एक विशेष ट्रेन से इन्हें जम्मू रवाना किया गया था। अब तक कुल 1200 जमातियों को देश के अलग-अलग हिस्सों में विशेष ट्रेन और बसों के जरिए भेजा जा चुका है। इसमें उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल के तब्लीगी जमात के लोग शामिल हैं।
अभी भी लगभग दो हजार जमाती विभिन्न क्वारंटीन सेंटर में
जानकारी के मुताबिक दिल्ली के अलग-अलग क्वारंटीन सेंटर में अभी भी तब्लीगी जमात के लगभग दो हजार लोग रह रहे हैं। ये देश के अलग-अलग राज्यों से हैं। इसमें हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वी राज्यों के लोग शामिल हैं।
कैसे बनी भेजने की रणनीति
दिल्ली के क्वारंटीन सेंटर में तब्लीगी जमात के लोगों के ज्यादा दिन रोके जाने पर कई लोगों ने आपत्ति जताई थी। दिल्ली सरकार तक इसकी शिकायत पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इन लोगों को इनके घरों को भेजने की रणनीति बनाने का सुझाव दिया था। इसके बाद इन लोगों के संबंधित राज्यों से आपसी तालमेल हो जाने के बाद इन्हें लगातार इनके गृहराज्यों को भेजा जा रहा है।