अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने टोक्यो में होने वाली क्वाड की बैठक से पहले ही ताइवान पर बोलकर चीन को खुली चुनौती दे दी है। हालांकि इस मामले में भारत ने अपना रुख सामान्य रूप से ही अख्तियार किया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि टोक्यो में होने वाली अहम बैठक से पहले अमेरिका के इस बयान से भारत को बहुत ताकत मिली है। खास बात यह है कि भारत ने ताइवान मामले में फिलहाल जापान में अपनी कोई राय नहीं रखी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ताइवान को लेकर भारत का रुख वही है जो कि पहले से था।
- devusinh Chauhan (@devusinh) 23 May 2022
डॉक्टर चारू कहते हैं कि चीन पहले से ही क्वाड को मिनी नाटो के तौर पर स्थापित करने की पुरजोर कोशिश करता रहता था। लेकिन इस संगठन की स्थापना की मायने बिल्कुल अलग थे। क्योंकि पूरी दुनिया को इस बात का अंदेशा है कि चीन ताइवान पर अपनी बुरी नजर पर लगाए हुए है, और कभी भी उस पर हमला कर सकता है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का खुले रुप से सैन्य हस्तक्षेप करने का बयान चीन को अखरने वाला ही है।
विदेशी मामलों के जानकार डॉ अभिषेक सिंह कहते हैं कि दरअसल अमेरिका ने टोक्यो से अपना संदेश स्पष्ट कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की यह पहली एशिया यात्रा है और इस यात्रा को लेकर के चीन शुरुआत से ही किसी भी बैठक को फेल होने की लगातार अफवाहें उड़ाता रहा है। अभिषेक कहते हैं, जबकि हकीकत इससे विपरीत है। वह कहते हैं कि भारत, जापान के साथ मिलकर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के सहयोग से इंडो पैसिफिक रीजन में इकोनॉमिक फ्रेमवर्क को मजबूत करना चाहता है। इसके अलावा भारत क्वाड की बैठक में टेक्नोलॉजी, कोविड से लड़ने के लिए वैक्सीन और पूरे इंडो पैसिफिक रीजन, जिसमें भारत की बढ़ती भूमिका और उसके समग्र विकास को लेकर चर्चा करना शामिल है। सिर्फ इन मुद्दों पर ही नहीं बल्कि भारत सप्लाई चेन, डिजिटल ट्रेड, क्लीन एनर्जी समेत समग्र विकास और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों पर बातचीत कर उनका न सिर्फ समाधान निकालना कर उस दिशा में आगे बढ़ कर अपने देश की अर्थव्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ पूरी दुनिया में व्यापारिक दृष्टिकोण से अव्यवस्थाओं को और सुगम बनाना है।
अभिषेक कहते हैं कि अमेरिका भी इन्हीं मामलों पर बातचीत करेगा, लेकिन उसकी मंशा इसके अलावा और भी बहुत चीजों को लेकर के बनी हुई है। वे कहते हैं कि वह दो साल पहले तैयार किए गए आकस (AUKUS) ग्रुप के माध्यम से अपनी सैन्य ताकत को भी इस क्षेत्र में स्थापित करना चाहता है। हालांकि यह बात दीगर है भारत उसका फिलहाल हिस्सेदार नहीं है। अभिषेक कहते हैं भारत की अप्रोच जापान के प्रधानमंत्री और ऑस्ट्रेलिया के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री को विकास के लिहाज से न सिर्फ फायदेमंद लग रही है, बल्कि भारत के साथ विकास के मुद्दों पर द्विस्तरीय और त्रिस्तरीय वार्ता के लिए भी आगे का रोडमैप तैयार कर रहे हैं।