पुरुषोत्तम अग्रवाल का कहना है कि ऐसे दौर में वीरेंद्र सेंगर की पत्रकारिता सच कहने की हिम्मत करने वालों को मार्ग दिखाती है। पुरुषोत्तम अग्रवाल ने यह बात वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय वीरेंद्र सेंगर की दो पुस्तकों के विमोचन के अवसर पर कही।
वरिष्ठ विद्वान पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि आज पत्रकारिता एक संकट के दौर से गुजर रही है। भविष्य में कभी इस समय पर ऐतिहासिक दस्तावेज लिखा जाएगा तो आज की परिस्थित के लिए वर्तमान पत्रकारिता को एक कठघरे में खड़ा हुआ पाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे दौर में वीरेंद्र सेंगर की पत्रकारिता सच कहने की हिम्मत करने वालों को मार्ग दिखाती है। पुरुषोत्तम अग्रवाल ने यह बात वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय वीरेंद्र सेंगर की दो पुस्तकों के विमोचन के अवसर पर कही।
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डॉक्टर सोमपाल शास्त्री ने कहा कि सत्य ही धर्म होता है। कुछ भी कहने के पहले यदि अपने अंतर्मन से यह पूछ लिया जाए कि क्या यह स्वयं उसके लिए सही होगा, तो अंतर्मन सत्य की राह दिखा देता है। उन्होंने कहा कि वीरेंद्र सेंगर इस तथ्य पर पूरी तरह खरे उतरते थे। पूर्व पुलिस अधिकारी विभूति नारायण राय ने कहा कि वीरेंद्र सेंगर के अंदर एक साफगोई थी जो उनकी पहली मुलाकात से अंत तक बनी रही। संतोष भारती ने कहा कि वीरेंद्र सेंगर जैसे विद्वान पत्रकार के देहावसान पर शोक नहीं प्रकट करना चाहिए। इसकी बजाय उनके कार्यों को याद कर उत्सव बनाना चाहिए। किसान और कृषि पर उनकी रिपोर्टिंग शानदार अनुभव रही।
पत्रकारिता क्षेत्र के एक बड़े नाम कमर वाहिद नकवी ने कहा कि मीडिया का काम सच बोलना है। सच बोलकर कभी किसी को ठगा नहीं जा सकता। यदि कोई सच नहीं बोल रहा है तो वह लोगों को ठगने का ही काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया का पूरा विकास सच सूचना के प्रसार के कारण ही हुआ है। सही सूचना का प्रसार न होने का अर्थ दुनिया का विकास रोकना भी है। इसलिए मीडिया को सच कहने का काम करना चाहिए।
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वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री ने कहा कि वीरेंद्र सेंगर एक बेहतरीन पत्रकार थे। लेकिन सबसे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि वे एक बेहतरीन इंसान थे। जो भी उनके करीब रहा है, उन सबको यह एहसास होता है कि वे उसी के सबसे करीब थे। यही उनके व्यक्तित्व की विशेषता थी। उन्होंने कहा कि वीरेंद्र सेंगर ने जिस तरह हाशिमपुरा कांड की रिपोर्टिंग की थी, वह पत्रकारिता के सर्वोच्च स्तर को प्रदर्शित करता है। भविष्य में जब भी हिंदी पत्रकारिता में सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टिंग का इतिहास लिखा जाएगा, वीरेंद्र सेंगर की इस रिपोर्टिंग के बिना यह कभी पूर्ण नहीं होगा।
वीरेंद्र सेंगर की दो पुस्तकों (आगे और आग है, और सच के सिवाय) के विमोचन के अवसर पर उनके करीबी पत्रकार और शुभचिंतक शामिल थे। इन पुस्तकों में वीरेंद्र सेंगर के कार्यों, लेखन और अनुभवों के साथ-साथ उनसे जुड़े रहे लोगों के उनके साथ बिताए पलों के अनुभवों को भी शामिल किया गया है।