पुरी में रथ यात्रा की अनुमति देने की वकालत करते हुए राज्यसभा सदस्य और लोकप्रिय शिल्पकार रघुनाथ महापात्रा ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट को यह भ्रामक तथ्य दिया गया है कि पुरी की रथ यात्रा में 10-12 लाख लोगों का जमावड़ा होगा। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य महापात्रा ने कहा कि जमावड़े में लोगों की संख्या को देखते हुए ही सुप्रीम कोर्ट ने वार्षिक रथ यात्रा पर रोक लगाई है।
इस बीच गजपति महाराज ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को लिखे अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि पुरी में भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा का आयोजन स्वीकृत और अनिवार्य है। गजपति महाराज ने स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण, निलाद्री महोदया और बामदेब संहिता से संदर्भ देते हुए उक्त बात कही। वे चाहते हैं कि राज्य सरकार न्यायालय से रथ यात्रा की अनुमति ले ले, भले ही उसमें लोग शामिल ना हों।
मंदिर प्रबंधन समिति के प्रमुख गजपति महाराज ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा, इन पुराणों में स्पष्ट लिखा है कि श्री श्री जगन्नाथ महाप्रभु जिन्हें पुराणों में श्री पुरुषोत्तम कहा गया है, परमात्मा हैं। वह अवतार नहीं बल्कि अवतारी हैं और पृथ्वी पर उनका स्थायी निवास है। रथयात्रा महज परंपरा नहीं है बल्कि सदियों से चला आ रहा धार्मिक अनुष्ठान है, उसे किसी भी हाल में रोका नहीं जा सकता है, फिर चाहे कोरोना वायरस महामारी ही क्यों न हो।