पुरी में 15 लाख भक्तों ने देखा जगन्नाथ जी का सुनाबेशा उत्सव
गौरतलब है कि रविवार को पुरी में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के ‘सुनाबेशा’ (सोने की पोशाक) दर्शन के लिए करीब 15 लाख भक्त जुटे। 12वीं सदी के श्रीमंदिर के सामने रथों पर विराजमान भगवानों को सोने के आभूषणों से सजाया गया।
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क्या है सुनाबेशा उत्सव की इतिहास?
सुनाबेशा की परंपरा 1460 से चल रही है, जब राजा कपिलेंद्र देव ने युद्ध में जीत के बाद मंदिर को ढेर सारा सोना दान किया था। भगवानों को लगभग 208 किलोग्राम सोने के आभूषणों से सजाया गया। भगवान जगन्नाथ के हाथ में सोने का चक्र और चांदी की शंख, बलभद्र के पास सोने का हल और गदा, और देवी सुभद्रा के पास भी सोने के कई आभूषण थे। इस भव्य दर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रही। 205 प्लाटून राज्य पुलिस, 800 केंद्रीय बलों के जवान, ड्रोन और एआई तकनीक से भीड़ और ट्रैफिक पर नजर रखी गई।