गिर सकता है पुरी का जगन्नाथ मंदिर
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भारतीय पुरातत्व सर्वे (एएसआई) का कहना है कि ओडीशा में पुरी का जगन्नाथ मंदिर कभी भी गिर सकता है। एएसआई की तकनीकी कोर समिति के अध्यक्ष जीसी मित्रा ने कहा है कि ये मंदिर ‘हाई रिस्क’ पर है और अगर समय पर ज़रूरी कदम नहीं उठाए गए तो सदियों पुराना ये मंदिर ध्वस्त हो सकता है। यह कहते हुए उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है।
मित्रा के इस बयान के बाद ओडीशा में हर तरफ़ इस मुद्दे की चर्चा हो रही है। प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष प्रसाद हरिचंदन ने मित्रा से अपना इस्तीफ़ा वापस लेने को कहा है। इससे पहले राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर आग्रह किया कि मंदिर के जगमोहन परिसर को लेकर तत्काल कदम उठाए जाएं। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि एएसआई की हीलाहवाली की वजह से राज्य के लोगों और जगन्नाथ संस्कृति के प्रेमियों की भावनाओं को ठेस लग रही है।
उन्होंने कहा कि एएसआई काम तो शुरू करती है लेकिन समय पर उसे पूरा नहीं किया जाता है। सोमवार को नई दिल्ली में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय संस्कृति मंत्री डॉ। महेश शर्मा, एएसआई के महानिदेशक और अन्य अधिकारियों ने इस मुद्दे पर चर्चा की। बैठक के बाद, महेश शर्मा ने कहा कि तकनीकी कारणों से जगमोहन की मरम्मत के काम में देरी हो रही है।
उन्होंने कहा कि संस्कृति सचिव के नेतृत्व में एक टीम तुरंत ओडीशा का दौरा करेगी। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, "मंदिर की मरम्मत के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। आखिरकार ये जगन्नाथ संस्कृति के करोड़ों लोगों की भावनाओं का मामला है। राज्य के मुख्यमंत्री का पत्र मिलने के बाद प्रधानमंत्री खुद इस मामले को देख रहे हैं।"