ओडिशा सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा, मंदिर के गजपति व सेवायत को ही रथ खींचने की इजाजत दी जाएगी, जो कोरोना नेगेटिव पाए गए हैं। वहीं, ओडिशा विकास परिषद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा, राज्य में कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है।
रथयात्रा में बड़ी संख्या में लोग आते हैं। हालांकि सीमित संख्या में लोगों को रथयात्रा में शामिल होने की इजाजत दी जा सकती है। वहीं, श्रद्धालुओं की ओर से कहा गया कि वे टीवी पर रथयात्रा देख लेंगे। ऐसे में सीमित लोगों को रथ यात्रा की इजाजत मिलनी चाहिए।
लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक मान्यता
जगन्नाथ संस्कृति जन जागरण मंच की ओर से दायर याचिका में कहा गया, यह उत्सव लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक मान्यता से जुड़ा है। सामाजिक दूरी बरकरार रखते हुए आयोजन असंभव नहीं है। ओडिशा हाईकोर्ट के निर्देश के साथ राज्य सरकार के फैसले के मुताबिक, रथ निर्माण में डेढ़ महीने से लगे 372 लोग अलग हैं। जांच में उनमें से कोई कोरोना संक्रमित नहीं मिला है।
वहीं, अफताब हुसैन और भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी आदेश में सुधार की याचिका पेश की थी। दरअसल, ओडिशा विकास परिषद की याचिका पर 18 जून को सुप्रीम कोर्ट ने रथयात्रा पर रोक लगाई थी। तब कोर्ट ने कहा था, लोगों की सुरक्षा एवं जन स्वास्थ्य के हित में रथयात्रा को अनुमति नहीं दी जा सकती। अगर हम अनुमति देते हैं तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे।
रथयात्रा पर जारी संशय के बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव से बात की। शाह ने इसकी जानकारी देते हुए ट्वीट किया, भगवान जगन्नाथ के अनन्य भक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर मैंने रविवार शाम गजपति महाराज (पुरी के राजा) और पुरी के शंकराचार्य से बात की। यात्रा के बारे में उनके विचारों से प्रधानमंत्री को अवगत कराया।
प्रधानमंत्री ने न केवल श्रद्धालुओं की भावनाओं को समझा, बल्कि इस मामले में तुरंत सकारात्मक हल निकालने के लिए प्रयास शुरू हुए, ताकि हमारी महान परंपरा कायम रहे। शाह ने लिखा, पीएम के निर्देश पर सोमवार सुबह सॉलिसिटर जनरल से बात की। मामले की गंभीरता को देखते हुए इस केस को सुप्रीम कोर्ट की अवकाश पीठ के समक्ष उठाया गया। दोपहर बाद हुई सुनवाई में यह सुखद फैसला आया। इसके लिए ओडिशा के लोगों को बधाई।