पंजाब की सियासत चर्चा में है। गृह मंत्री अमित शाह ने नशे के खिलाफ हुंकार भरी है। इस बार भाजपा और क्षेत्रीय क्षत्रप- शिरोमणी अकाली दल (शिअद) साथ खड़े हैं। हालांकि, राजनीतिक चौसर पर मौजूदा सत्ताधारी दल- आम आदमी पार्टी (AAP) को पटखनी पर मंथन के साथ-साथ शह और मात की रणनीति भी बन रही है। इसी बीच नशे के खिलाफ अभियान की चिंता भी सता रही है।
पंजाब विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भाजपा के बीच छह साल पहले टूटी दोस्ती बहाल होनी करीब-करीब तय है। हालांकि पार्टी नेतृत्व को चुनाव पूर्व गठबंधन के कारण राज्य में उसकी ओर से छेड़े गए नशे के खिलाफ अभियान को धक्का लगने की आशंका है। दरअसल शिअद की अगुवाई वाली 2007 से 2017 तक की सरकार के दौरान ही राज्य में ड्रग माफिया के पैर पसारने के आरोप लगे थे।
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इस बार की चुनावी जंग त्रिकोणात्मक
पंजाब की रणनीति से जुड़े भाजपा के वरिष्ठ नेता के मुताबिक दोनों दलों के फिर से साथ आने के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण दोनों दलों की संयुक्त ताकत है। साथ रहते दोनों दलों को कम से कम 37% वोट मिले हैं। चूंकि इस बार की चुनावी जंग त्रिकोणात्मक होगी, ऐसे में चुनाव पूर्व गठबंधन सत्ता हासिल करने की स्थिति में होगी। इसके उलट अलग-अलग रहने का नुकसान दोनों दलों को हुआ है।
अभियान पर विपक्ष होगा हमलावर...
पार्टी सूत्रों ने कहा कि गठबंधन की स्थिति में कांग्रेस और आप के पास हमला बोलने का मौका होगा। हालांकि शिअद करीब दस साल से सत्ता से दूर है। ऐसे में भाजपा की कोशिश इस मुद्दे को कांग्रेस और वर्तमान मान सरकार से जोड़ने की होगी।