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GST काउंसिल की बैठक से पहले बोले पंजाब के वित्त मंत्री- केन्द्र सरकार की जीएसटी ने बहुत उलझा दिया है

Wed, 17 Jan 2018 09:19 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली 
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वित्त मंत्री अरूण जेटली - फोटो : PTI
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कांग्रेस ने हमेशा से जीएसटी का पक्ष लिया है, ले रही है और लेती रहेगी, लेकिन जिस तरह से केन्द्र सरकार जीएसटी के नियम कायदे तय कर रही है, उसने बहुत उलझा दिया है। यह आरोप पंजाब के वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह का है। मनप्रीत सिंह का कहना है कि 18 जनवरी को जीएसटी काऊंसिल की बैठक है। पहले 320 पेज का दस्तावेज आया था और जीएसटी काऊंसिल की बैठक से ठीक एक दिन पहले 17 जनवरी को इससे जुड़ा 80 पेज का दस्तावेज आया है। हर बार की जीएसटी काऊंसिल की बैठक में केन्द्र सरकार की बेचैना इसी तरह से साफ दिखाई पड़ती है। 
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सरकार न तो होमवर्क कर रही है न सलाह ले रही है

वित्त मंत्री मनप्रीत का कहना है कि जीएसटी जैसे एक अच्छे प्रावधान को सही ढंग से लागू न करके केन्द्र सरकार ने देश को आर्थिक उन्नति के रास्ते पर ले जाने का बड़ा अवसर खो दिया है। पंजाब के वित्त मंत्री ने कहा कि इसका राज्यों के राजस्व पर बुरा असर पड़ रहा है। बार-बार नियम बदले जा रहे हैं। इसके कारण अभी तक जीएसटी का रिटर्न लोग दाखिल नहीं कर रहे हैं। जीडीपी दर गिर रही है। मंहगाई की दर बढ़ रही है और ऐसा लग रहा है कि आने वाले समय में जटिलताएं बढऩे वाली हैं। मनप्रीत सिंह ने एक आरोप और लगाया। उनका कहना है कि जीएसटी काऊंसिल की बैठक और नियमों में होने वाले बदलाव या चार स्तर के टैक्स की दरों में परिवर्तन को लेकर भी न तो उचित ढंग से होमवर्क किया जा रहा है और न ही सलाह ली जा रही है।

पेट्रोलियम और रियल एस्टेट पर लगे जीएसटी 

पंजाब के वित्त मंत्री ने कहा कि यूपीए सरकार के राज में कच्चे तेल का भाव 130-140 अमेरिकी डालर प्रति बैरल था। लेकिन तब भी देश की जनता को डीजल और पेट्रोल के इतने दाम नहीं चुकाने पड़ते थे। मनप्रीत सिंह ने कहा कि गुरूवार के जीएसटी काऊंसिल बैठक के एजेंडे में पेट्रोलियम पदार्थ नहीं है। लेकिन वह दबाव बनाएंगे कि जीएसटी काऊंसिल इस पर विचार करे। पेट्रोलियम पदार्थ और रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाया जाए। पंजाब के वित्त मंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार को जनता की परेशानियों को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीएसटी का कानून लागू होने के बाद से देश में अर्थ व्यवस्था की वृद्धि पर बुरा असर पड़ा है। औद्योगिक विकास की रफ्तार धीमी हुई है और देश के भीतर नकारात्मकता बढ़ी है।
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ई-वे बिल को टाला जाए

जीएसटी काऊंसिल की बैठक में ई-वे बिल का मुद्दा आना है। सरकार की मंशा जीएसटी के कानून में संशोधन में भी दिखाई दे रही है। मनप्रीत सिंह का कहना है कि ई-वे बिल के प्रावधान बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं है। इसमें प्रावधान है कि बिल बनने के बाद 24 घंटे के भीतर वस्तु को 100 किमी तक मूव करना होगा। 72 घंटे में इसकी डिलिवरी सुनिश्चित करनी होगी। जबकि दिल्ली समेत देश के तमाम हिस्से में 14-15 घंटे तक नो इंट्री रहती है। इसलिए इस तरह के किसी प्रावधान को थोपने से पहले व्यापक परामर्श की जरूरत है। इसलिए वह 18 जनवरी की बैठक में इस प्रावधान को अगले कुछ महीनों के लिए टालने की मांग करेंगे। यह पूछे जाने पर कि कर्नाटक और गुजरात में ई-वे बिल लागू है, जिसपर मनप्रीत सिंह ने कहा कि वहां इसे अमल में लाए जाने के पहले काफी होमवर्क हुआ था। 
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