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पंजाब चुनाव को 'अवसर' मान रहा है पाकिस्तान: सीमावर्ती राज्य में तोड़फोड़ करने के लिए पड़ोसी की नई साजिश

सार

केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, इस इनपुट को पंजाब सरकार के साथ साझा किया गया है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा चूक मामले में भी ऐसे ही इनपुट सामने आए थे। तब भी पंजाब पुलिस को बताया गया था कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन, चुनावी रैली और वीवीआईपी को निशाना बना सकते हैं...
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पंजाब: प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंध - फोटो : Agency (File Photo)
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भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगते पंजाब में चुनावी सरगर्मियां जोरों पर हैं। दूसरी तरफ, पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' भी इस चुनाव को 'अवसर' मानकर चल रही है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को जो इनपुट मिल रहे हैं, वे किसी बड़ी आतंकी साजिश की ओर इशारा करते हैं। केंद्रीय एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि आईएसआई ने पंजाब चुनाव में तोड़फोड़ करने के लिए अपने छोटे-बड़े सभी आतंकी संगठनों को सक्रिय कर दिया है। ऐसा पहली बार है कि किसी एक टास्क के लिए इतने सारे आतंकी समूहों को जिम्मेदारी दी गई हो। आईएसआई द्वारा थल एवं जल के माध्यम से पंजाब में मौजूद अपने गुर्गों तक आरडीएक्स एवं दूसरे आतंकी हथियार की सप्लाई योजना तैयार की गई है। इसके लिए पंजाब के सिख मिलिटेंट एवं खालिस्तानी संगठनों की मदद ली जाएगी।

पंजाब में सिमी अभी भी है मौजूद

केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, इस इनपुट को पंजाब सरकार के साथ साझा किया गया है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा चूक मामले में भी ऐसे ही इनपुट सामने आए थे। तब भी पंजाब पुलिस को बताया गया था कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन, चुनावी रैली और वीवीआईपी को निशाना बना सकते हैं। एक्स 'स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया' (सिमी) के बारे भी इनपुट जारी किया गया है। इस संगठन की जड़ें अभी पंजाब में बताई गई हैं। इसके सदस्यों को सक्रिय करने का प्रयास हो रहा है। ऐसे खालिस्तानी संगठन जो पाकिस्तान या दूसरे किसी देश से अपनी गतिविधियां संचालित करते हैं, उन्हें भी आईएसआई ने अपना मोहरा बना लिया है। इनका इस्तेमाल पंजाब चुनाव में तोड़फोड़ के लिए हो सकता है।  

लखबीर सिंह का सीमाई इलाकों में खासा नेटवर्क

पाकिस्तान आधारित सिख तत्वों (आतंकी एवं मददगार) में अंतरराष्ट्रीय सिख यूथ फेडरेशन 'आईएसवाईएफ' भी शामिल है। इसके चीफ लखबीर सिंह को पाकिस्तानी आईएसआई के हैंडलरों की मदद से पंजाब सीमा में आरडीएक्स से लेकर हथियार एवं ड्रग पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। बताया गया है कि लखबीर सिंह का सीमाई इलाकों में खासा प्रभाव है। आसपास के गांव में उसके अनेक गुर्गे सक्रिय हैं। यहां तक कि वे आईईडी और टिफिन बम तैयार करने में भी माहिर हैं। पिछले साल बॉर्डर इलाके में दर्जनों ऐसे मामले देखने को मिले थे, जिनमें तस्कर या आतंकी हथियार एवं ड्रग छोड़कर भाग गए थे। उनमें से कई तस्कर तो बीएसएफ की गोली का निशाना भी बने थे। गत वर्ष भारत पाकिस्तान सीमा के पंजाब सेक्टर में ड्रोन की 59 गतिविधियां सामने आई थीं। इसके लिए पंजाब पुलिस और बीएसएफ को सतर्क किया गया है। हालांकि अब बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा से 50 किलोमीटर अंदर तक बढ़ाने  के बाद पंजाब पुलिस को विशेष मदद मिलेगी।

ये गुट हैं सक्रिय

इनपुट में बताया गया है कि पाकिस्तानी आईएसआई के सहयोग से अपनी गतिविधियों को अंजाम देने वाले वधावा सिंह बब्बर (बीकेआई) भी सक्रिय हैं। इनके साथ ही केसीएफ/पी के परमजीत सिंह पंजावर और केजेडीएफ के रणजीत सिंह नीता भी शामिल हैं। आईएसवाईएफ/आर के प्रमुख लखबीर सिंह रोधे भी आईएसआई के संपर्क में बताए गए हैं। ये संगठन भी पंजाब चुनाव में वीवीआईपी और उनके रूट पर हमला या विस्फोट कर सकते हैं। पाकिस्तान के पुराने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मुहम्मद और तहरीक-ए-तालिबान, इंडियन मुजाहिदीन, हरकत-उल-मुजाहिदीन, हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी व हिजबुल मुजाहिदीन के सदस्यों को सक्रिय किया जा रहा है। हालांकि इनमें से कई संगठन कश्मीर में सक्रिय रहे हैं, लेकिन मौजूदा वक्त में उनके सामने भर्ती का बड़ा संकट बताया जा रहा है। खुफिया रिपोर्ट बताती है कि पंजाब में आतंकियों की ओर से सबसे अधिक खतरा वीवीआईपी मूवमेंट को लेकर है। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में ड्रोन की गतिविधियों पर भी नजर रखने के लिए कहा है।

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