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पंजाब कांग्रेस: सिद्धू को जिद और कैप्टन को अपनी अकड़ छोड़ देनी चाहिए

Thu, 01 Jul 2021 05:34 AM IST
देव कश्यप शशिधर पाठक, नई दिल्ली

सार

  • पंजाब के कांग्रेसी चाहते हैं कि सिद्धू को जिद और कैप्टन को अपनी अकड़ छोड़ देनी चाहिए
  • दोनों के बीच चल रही जंग में कांग्रेस का नुकसान और आम आदमी पार्टी का हो रहा है फायदा
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प्रियंका गांधी वाड्रा से मिले नवजोत सिंह सिद्धू - फोटो : Twitter@SherryOnTopp
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विस्तार
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पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिंह सिद्धू के बीच चल रही रस्साकसी को तालमेल में बदलने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मोर्चा संभाल लिया है। बुधवार को वह पहले राहुल गांधी से मिली, इसके बाद सिद्धू को सुना और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पास विमर्श के लिए गई।

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इसके बाद प्रियंका राहुल के घर आई और दोनों भाई-बहन एक साथ कांग्रेस अध्यक्ष के पास पहुंचे। शाम को सिद्धू ने राहुल गांधी से मुलाकात की। यह बड़ा संकेत है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही मुद्दे का समाधान निकल आएगा। पंजाब की राजनीति को जानने और समझने वाले कांग्रेसियों का कहना है कि पार्टी हित में कैप्टन को अपनी अकड़ और सिद्धू को अपनी जिद  छोड़ देनी चाहिए।

डॉ. सविता धवन लुधियाना से पुरानी कांग्रेसी नेता हैं। उनके पति डॉ. अरुण धवन भी कांग्रेसी हैं। दोनों का कहना है कि प्रदेश के शीर्ष नेताओं की इस रस्साकसी में कांग्रेस का नुकसान हो रहा है। इसके समानांतर आम आदमी पार्टी के पक्ष में राजनीतिक माहौल खड़ा होता जा रहा है। डॉ. धवन कहते हैं कि दिल्ली बार्डर पर किसान आंदोलन का जत्था पहुंचने के बाद से पंजाब में कांग्रेस पार्टी की स्थिति बहुत मजबूत हो गई थी। स्थानीय निकायों के चुनाव में सभी विरोधी दलों को मुंह की खानी पड़ी थी, लेकिन पिछले दो महीने से जारी घमासान ने पूरा राजनीतिक जायका बिगाड़ना शुरू कर दिया है।
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डॉ. अजय सिंह भी कांग्रेसी हैं। जालंधर में रहते हैं। अजय सिंह का कहना है कि दो की लड़ाई में पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं का हक मारा जा रहा है। यह ठीक नहीं है। कैप्टन के मंत्रिमंड़ल में उनके साथी अपनी प्रतिक्रिया में कहते हैं कि दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोय (कांग्रेस) वाली हालत होती जा रही है। वह बताते हैं कि उन्होंने दिल्ली में राहुल गांधी से उनके आवास पर भेंट की थी। उन्हें सब बताया था, लेकिन कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व अभी दो में ही उलझा है।  

कौन है किस पर भारी?
पंजाब के नेताओं से बात कीजिए तो वह कहते हैं कि कैप्टन अमरिंदर सिंह आज भी कांग्रेस के बड़े नेता हैं। नवजोत सिंह सिद्धू युवाओं में लोकप्रिय हैं। गुरदीप सिंह कहते हैं कि कैप्टन को नजरअंदाज करके कांग्रेस अगले साल होने वाला चुनाव नहीं जीत सकती, क्योंकि कैप्टन ने पंजाब में अपनी जगह बना ली है। गुरदीप कहते हैं कि सिद्धू की राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता अभी साबित होनी है।

सिद्धू के नाराज होने से कुछ सीटें कम आ सकती हैं, लेकिन कैप्टन के नाराज होने से नाव के डूबने का खतरा रहेगा। परगट सिंह समेत तमाम नेता पंजाब को लेकर शीर्ष कांग्रेस नेतृत्व के निर्णय पर निगाह गड़ाए हैं। वहीं पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर पूरा भरोसा है। सुनील जाखड़ को राहुल गांधी ने भी भेंट के दौरान भरोसा दिया है।

क्या है उम्मीद : कैप्टन के मंत्रिमंडल में इंट्री लेंगे सिद्धू
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अभी इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। उनकी सलाह है दो-चार दिन इंतजार किया जाए। लेकिन ऐसी उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेता करीब-करीब नतीजे पर पहुंच चुके हैं। वह न तो कैप्टन को बहुत दु:खी और निराश करना चाहते हैं और न ही सिद्धू के दोनों हाथ में लड्डू देने को तैयार हैं। तीन सदस्यीय समिति में शामिल एक नेता ने कहा कि एक को नहीं दोनों को पार्टी हित में झुकना पड़ेगा, बात तभी बनेगी।

सूत्र का कहना है कि एक साल की बात है। अगले साल चुनाव होना है। चुनाव भी कैप्टन अमरिंदर सिंह के चेहरे, पंजाब सरकार के कामकाज पर लड़ा जाएगा। इसलिए सिद्धू को कैप्टन के मंत्रिमंडल में शामिल होने का मन बनाना चाहिए और प्रदेश कांग्रेस को पूरी ताकत से आगामी विधानसभा चुनाव का मुकाबला करना चाहिए।

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