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पंजाब विधानसभा चुनाव: राष्ट्रीय एकता-नशा मुक्ति होगा भाजपा का एजेंडा, दलितों-युवाओं पर रहेगा सबसे अधिक फोकस

सार

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने राष्ट्रीय एकता और नशा मुक्ति को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया है। पार्टी की रणनीति दलित समुदाय और युवाओं पर खास ध्यान देने की है, क्योंकि उसे इन वर्गों में समर्थन बढ़ाकर राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की उम्मीद है। पढ़िए रिपोर्ट-
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नितिन नवीन, भाजपा अध्यक्ष - फोटो : एक्स/नितिन नवीन
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विस्तार
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के तीन दिवसीय दौरे के बाद पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी ने अपनी दिशा तय कर दी है। चुनाव में भाजपा का एजेंडा राष्ट्रीय एकता और नशा मुक्त पंजाब होगा।
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पार्टी के फोकस में सबसे बड़ी दलित आबादी और युवा वर्ग रहेगा। इस दौरे के साथ ही भाजपा ने राज्य में अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरने का भी संकेत दे दिया है। ऐसे कई कारण हैं, जिसके चलते भाजपा को चुनावी रणनीति को दलित आबादी और युवा वर्ग पर फोकस करने में लाभ नजर आ रहा है। राज्य में 30 सीटें अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षित हैं, जबकि दलित आबादी का 50 सीटों पर खासा प्रभाव है।

पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर इस बिरादरी में पैठ बनी तो भाजपा राज्य में अपनी मजबूत पहचान बना सकती है। इसी रणनीति के तहत नितिन ने अपने दौरे में राज्य इकाई को मालवा, माझा और दोआबा के ग्रामीण इलाकों में युद्ध स्तर पर संपर्क अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है।
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सूत्रों ने बताया कि मजबूत संदेश देने के लिए भाजपा इस बार टिकट वितरण में दलित बिरादरी और युवा वर्ग को विशेष तरजीह देगी। पार्टी के एक रणनीतिकार ने कहा कि दलित आबादी के कई समूहों मसलन मजहबी सिख, राम दसिया, आधी धर्मी, वाल्मिकी में बंटे होने के कारण इनका सियासी रसूख कायम नहीं हो पाया।
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