महाराष्ट्र के सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय (एसपीपीयू) द्वारा जारी किए गए एक सर्कुलर के बाद विवाद शुरू हो गया है। विश्वविद्यालय ने अपने सर्कुलर में कहा है कि विश्वविद्यालय अब सिर्फ उन छात्रों को गोल्ड मैडल देगा जो शाकाहारी होंगे और किसी प्रकार का नशा नहीं करते होंगे।
इस सर्कुलर को लेकर कई राजनीतिक पार्टियों और छात्र संगठनों ने विरोध भी किया है। एनसीपी की नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने ट्वीट किया, 'पुणे यूनिवर्सिटी का फैसला निराशाजनक और चौंकाने वाला है। अपने राज्य की शिक्षा पर गर्व है, हमारी यूनिवर्सिटीज को क्या हो गया है, कृपया खाने की जगह शिक्षा पर ध्यान दें।'
Shocking disappointing decision by Pune University - so proud of education in our state, What has happened to our universities . Please focus on Education not food.
— Supriya Sule (@supriya_sule) 10 November 2017
वहीं कांग्रेस ने इस सर्कुलर को बेवकूफाना बताया है। कांग्रेस नेता विश्वजीत कदम ने कहा कि यह एक एजुकेशन डिग्री है न कि छात्रों के खाने-पीने की आदतों के आधार पर दिया जाने वाला कोई पुरस्कार है।
सर्कुलर में खाने के अलावा यह भी लिखा गया है कि मेडल के लिए अप्लाई करने वाले छात्र को भारतीय सभ्यता-संस्कृति में भी रुचि होनी चाहिए। साथ ही उसका योग, प्राणायाम और ध्यान में रूची होना भी अनिवार्य है।
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ट्रस्ट द्वारा दिया जाता है गोल्ड मेडल
यह गोल्ड मेडल योगमूर्ति राष्ट्रीय कीर्तनकर रामचंद्र गोपाल शेलर और त्यागमूर्ति श्रीमती सरस्वती रामचंद्र शेलर के नाम पर एक ट्रस्ट 2006 से छात्रों को दे रहा है। इसमें विज्ञान और गैर-विज्ञान दोनों स्ट्रीम के पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को वैकल्पिक तौर पर देता है।