भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में तीन आरोपियों की ओर से दाखिल की गई जमानत याचिका पर शुक्रवार को पुणे के सत्र न्यायालय में सुनवाई हुई। इसमें अदालत ने आरोपी मानवाधिकार कार्यकर्ता अरूण फरेरा, वेरनन गोंजाल्विस और सुधा भारद्वाज की जमानत याचिका खारिज कर दी। ये तीनों आरोपी फिलहाल अपने ही घर में नजरबंद हैं, जिसकी अवधि आज खत्म हो रही है। फिलहाल इस मामले में आरोपियों की हिरासत सात दिन के लिए बढ़ा दी गई है।
बता दें कि इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में भी अहम सुनवाई है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ रोमिला थापर द्वारा दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करेगी।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपनी पिछली सुनवाई में इस मामले में एसआईटी जांच से इनकार कर दिया था और पुणे पुलिस को ही इस मामले की जांच आगे बढ़ाने को कहा था। इसके बाद रोमिला थापर ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी।
वहीं, दूसरी ओर इस मामले की जांच के लिए और समय देने का आदेश रद्द करने के बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार की इस याचिका को स्वीकार कर लिया है। इस मामले पर 29 अक्तूबर को सुनवाई होगी।
क्या है मामला
दरअसल, महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में 1 जनवरी को हिंसा हुई थी, जिसकी जांच काफी लंबी चली और इसके तार प्रधानमंत्री मोदी की हत्या से जुड़े गए। जिसके बाद इस मामले में पुलिस ने की शहरों में छापेमारी कर पांच वामपंथी विचारकों को गिरफ्तार किया। बाद में उन्हें उनके ही घर में नजरबंद कर दिया गया।
हालांकि इनमें से एक आरोपी गौतम नवलखा की नजरबंदी खत्म हो गई है और उन्हें रिहा कर दिया गया है, जबकि बाकी के चार आरोपी वरवरा राव, अरूण फरेरा, वेरनन गोंजाल्विस और सुधा भारद्वाज अभी भी नजरबंद हैं।