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पुणे पोर्श केस: सादे वेश में बार-पब के निरीक्षण में जुटी पुलिस, ब्लड सैंपल बदलने के मामले में डॉक्टरों पर जांच

Tue, 28 May 2024 02:53 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) और पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सहित कम से कम 13 वरिष्ठ अधिकारी ग्राहक बनकर पब और बार में गए। इस दौरान उन्होंने कई नियमों का उल्लंघन होते हुए देखा
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पुणे पोर्श कांड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महाराष्ट्र में पुणे लक्जरी कार दुर्घटना मामले के बाद प्रशासन हरकत में आया। इस मामले के मद्देनजर नागपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने गुप्त तरीके से शहर के पब और बार में निरीक्षण करने गए। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रविवार को नागपुर पुलिस की विशेष टीम ने शहर के पब और बार का गुप्त रूप से दौरा किया। उनका एकमात्र मकसद महाराष्ट्र निषेध अधिनियम के उल्लंघनों का खुलासा करना था।
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अधिकारियों ने किया गुप्त तरीके से बार का निरीक्षण
एक अन्य अधिकारी ने कहा सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) और पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सहित कम से कम 13 वरिष्ठ अधिकारी ग्राहक बनकर पब और बार में गए। इस दौरान उन्होंने कई नियमों का उल्लंघन होते हुए देखा, जिसमें कम उम्र के ग्राहकों को शराब परोसना भी शामिल था। बार और पब के कुछ इलाकों में सीसीटीवी कैमरों की भी पहुंच नहीं थी। 

डॉक्टरों पर लगे आरोपों की जांच के लिए ससून अस्पताल पहुंचीं अधिकारी
पुणे लक्जरी कार दुर्घटना में डॉक्टरों पर लगे आरोपों की जांच के लिए जेजे अस्पताल की डीन डॉ. पल्लवी सपले ससून अस्पताल पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने मीडिया से भी बात की। डॉ. पल्लवी ने कहा, "मेरे सहित एक समिति का गठन किया गया है। हमें कल्याणी नगर घटना के संबंध में ससून अस्पताल में हुई घटना की जांच करनी है। हमें यह पता लगाना होगा कि यह नियमों के तहत किया गया था या नहीं। हम रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे।"
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दरअसल, आरोपी नाबालिग के पिता ने डॉक्टर को फोन किया और उन्हें लालच देते हुए खून के नमूने बदलने के लिए कहा। नाबालिग के खून के नमूने से छेड़छाड़ करने और सबूत नष्ट करने के आरोप में दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया है। ससून अस्पताल के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अजय तावरे और सरकारी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीहरि हार्लोर को गिरफ्तार कर लिया गया। 

क्या है पुणे लक्जरी कार दुर्घटना मामला?
पुणे शहर में 18-19 मई की दरम्यानी रात को करीब तीन करोड़ रुपये की पोर्श कार को तेज गति से दौड़ाने के चक्कर में 17 साल के लड़के ने एक बाइक को टक्कर मार दी थी। गाड़ी की टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक अपना संतुलन खोकर काफी दूर तक सड़क पर घिसटते चली गई, जिससे उस पर सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। मौके पर मौजूद लोगों ने हादसे की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद आरोपी नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस घटना के 14 घंटे बाद आरोपी नाबालिग को कोर्ट से कुछ शर्तों के साथ जमानत मिल गई थी। कोर्ट ने उसे 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने और सड़क दुर्घटनाओं के प्रभाव-समाधान पर 300 शब्दों का निबंध लिखने का निर्देश दिया था। बाद में विवाद बढ़ा तो कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद उसे 5 जून तक एक निरीक्षण गृह भेज दिया गया था। इसके अलावा इस मामले में अबतक नाबलिग के पिता और दादा को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
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