पुणे शहर की पुलिस ने 2018 कोरेगांव-भीमा झड़पों के दौरान स्थिति को चतुराई से संभाला और शहर में एक बड़ी अप्रिय घटना को रोकने में कामयाब रही। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला ने एक जांच आयोग को यह बताया है। तत्कालीन पुणे पुलिस आयुक्त शुक्ला ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जेएन पटेल की अध्यक्षता वाले दो सदस्यीय आयोग के समक्ष एक विस्तृत हलफनामा पेश किया है जो हिंसा की जांच कर रहा है।
1 जनवरी 2018 को भीमा कोरेगांव युद्ध के द्विशताब्दी समारोह के दौरान पुणे जिले के पेरने में युद्ध स्मारक के पास झड़पें हुई थीं। रश्मि शुक्ला ने कहा कि पुणे शहर की पुलिस ने अनुमान लगाया था कि उस दिन राज्य भर से बड़ी संख्या में लोग आएंगे और पर्याप्त सावधानी और उपाय किए थे।
उन्होंने कहा, जनशक्ति और पुलिस बल की प्रभावी तैनाती के कारण मेरे अधिकार क्षेत्र में पथराव या पुणे शहर की सीमा में हिंसा की घटना बहुत कम हुई थी। शहर में न तो कोई जानमाल का नुकसान हुआ और न ही हिंसा की कोई बड़ी घटना हुई। साथ ही 3 जनवरी 2018 की शाम के बाद पुणे में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
इससे पहले आयोग के वकील आशीष सतपुते ने एक आवेदन दायर कर मांग की थी कि रश्मि शुक्ला जो अब सीआरपीएफ में नियुक्त हैं, उन्हें एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जाए। दलित संगठन भीमा कोरेगांव की 1818 की लड़ाई में पुणे के पेशवा पर ईस्ट इंडिया कंपनी की जीत का जश्न मनाते हैं, क्योंकि ब्रिटिश सेना में उत्पीड़ित महार समुदाय के सैनिक शामिल थे।