पुणे की सरकारी जमीन से जुड़ा विवाद एक बार फिर गरमाया है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की फर्म अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को 42 करोड़ रुपये की डबल स्टांप ड्यूटी का नोटिस जारी किया गया है। इस पर महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि वह विभाग से इस कार्रवाई पर स्पष्टीकरण मांगेंगे।
मंडवा इलाके में सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर यह मामला सामने आया था। संयुक्त महानिरीक्षक (पंजीयन) ने शुक्रवार को अमाडिया एंटरप्राइजेज को नोटिस जारी किया, जिसमें डील रद्द करने से पहले डबल स्टांप ड्यूटी चुकाने को कहा गया। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि 1,800 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन को मात्र 300 करोड़ में खरीदने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद अजित पवार ने सौदा रद्द करने की घोषणा की थी।
मंत्री बावनकुले की प्रतिक्रिया
राजस्व मंत्री बावनकुले ने कहा कि जब जमीन सौदा रद्द किया जा चुका है, तब भी नोटिस क्यों जारी हुआ, इसकी जांच की जाएगी। उन्होंने कहा, “मुझे देखना होगा कि 42 करोड़ रुपये किस श्रेणी में मांगे गए हैं और क्यों। मैं पंजीयन विभाग से इसका स्पष्टीकरण लूंगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्थ पवार का नाम एफआईआर में नहीं है क्योंकि यह भूमि दस्तावेजों में दर्ज नामों पर आधारित है।
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मामले में कहां तक पहुंची जांच?
मंत्री ने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने उनसे मुलाकात की और संबंधित सबूत सौंपने की बात कही। उन्होंने कहा कि दोषी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, और जांच में नए नाम सामने आए तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। बावनकुले ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खरगे इस जांच का नेतृत्व कर रहे हैं और किसी तरह के राजनीतिक हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है।
एफआईआर में किस-किस का नाम?
एफआईआर में भूमि सौदे से जुड़े हस्ताक्षरकर्ताओं और बिक्रेताओं के नाम शामिल हैं, जिनमें दिग्विजय पाटिल, शीतल तेजवानी और उप-पंजीयक आर बी तारू शामिल हैं। इन पर धोखाधड़ी और गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सौदा रद्द करने के लिए फर्म को डबल स्टांप ड्यूटी यानी करीब 42 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। अजित पवार ने कहा था कि पार्थ को यह जानकारी नहीं थी कि जमीन सरकारी थी।