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पुणे में भ्रूण लिंग जांच गिरोह का भंडाफोड़: 12वीं पास शख्स चला रहा था रैकेट, आयुर्वेद डॉक्टर समेत दो गिरफ्तार

Thu, 04 Jun 2026 12:18 AM IST
शिवम गर्ग पीटीआई, पुणे

सार

पुणे के दौंड क्षेत्र में पुलिस ने अवैध भ्रूण लिंग जांच रैकेट का पर्दाफाश किया है। 12वीं पास मुख्य आरोपी मोबाइल ऐप से जुड़ी पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के जरिए लिंग परीक्षण करता था। आयुर्वेदिक डॉक्टर समेत दो लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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महाराष्ट्र के पुणे जिले में पुलिस ने अवैध भ्रूण लिंग जांच के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में एक आयुर्वेदिक डॉक्टर समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो अन्य डॉक्टर अभी फरार बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, संदिग्ध गर्भपात मामलों और रेफरल सिस्टम की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे रैकेट का मुख्य आरोपी केवल 12वीं तक पढ़ा हुआ है और उसके पास किसी प्रकार की चिकित्सकीय योग्यता नहीं है। इसके बावजूद वह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग बताने का अवैध कारोबार चला रहा था।

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सोशल मीडिया वीडियो से खुला मामला
पुलिस के अनुसार, इस रैकेट का खुलासा तब हुआ जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें कथित तौर पर अवैध लिंग जांच की गतिविधियां दिखाई गई थीं। वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने दौंड तहसील निवासी 42 वर्षीय अन्नासाहेब गिरी को गिरफ्तार किया। आरोप है कि वह बिना किसी मेडिकल डिग्री के गर्भस्थ शिशुओं का लिंग परीक्षण कर रहा था।

मोबाइल ऐप से जुड़ी मशीन का करता था इस्तेमाल
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी एक पोर्टेबल चीनी अल्ट्रासाउंड मशीन का उपयोग करता था, जिसे ब्लूटूथ के माध्यम से मोबाइल एप्लिकेशन से जोड़ा जाता था। इसी तकनीक की मदद से गर्भस्थ शिशु का लिंग पता लगाया जाता था। जांच के दौरान पुलिस ने इस मशीन को जब्त कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीक बेहद गोपनीय तरीके से इस्तेमाल की जाती थी, जिससे लंबे समय तक यह अवैध गतिविधि पकड़ में नहीं आई।
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एक जांच के लिए वसूलता था 5 से 15 हजार रुपये
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी प्रत्येक लिंग परीक्षण के लिए 5 हजार से 15 हजार रुपये तक वसूलता था। यदि गर्भ में कन्या भ्रूण होने की जानकारी मिलती थी, तो महिलाओं को नेटवर्क से जुड़े डॉक्टरों के पास भेजा जाता था, जहां कथित रूप से गर्भपात कराया जाता था। पुलिस को संदेह है कि पूरा गिरोह रेफरल सिस्टम पर काम कर रहा था। पहले मरीजों को आरोपी के पास भेजा जाता था और बाद में गर्भपात के लिए अन्य चिकित्सकों से संपर्क कराया जाता था।

आयुर्वेदिक डॉक्टर भी गिरफ्त में, दो डॉक्टर फरार
मामले में वाघोली निवासी बीएएमएस डॉक्टर अतुल जाधव को भी गिरफ्तार किया गया है। वहीं दो अन्य डॉक्टर अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। जांच एजेंसियां उनकी तलाश में जुटी हुई हैं। इसके अलावा नरेंद्र ठाकरे नामक एक अन्य आरोपी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि उसने मुख्य आरोपी को अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध कराई थी। ठाकरे पहले भी इसी तरह के एक मामले में गिरफ्तार हो चुका है।

हर महीने दर्जनों महिलाओं की होती थी जांच
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने पूछताछ में दावा किया है कि वह हर महीने 15 से 20 महिलाओं की जांच करता था। हालांकि पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह संख्या 30 से 50 मामलों प्रति माह तक हो सकती है। फिलहाल पुलिस डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितने अवैध लिंग परीक्षण और गर्भपात कराए गए।

पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्री-कंसेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (PCPNDT) एक्ट तथा भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

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