पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर 200 किलो विस्फोटक से लदी कार से हुए हमले ने पूरे सुरक्षा तंत्र को सकते में डाल दिया है। घाटी में लंबे समय से चल रहे आतंकवाद निरोधी अभियान के बावजूद इतना बड़ा हमला होना खुफिया तंत्र की नाकामी की ओर भी संकेत करता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने हमले के बाद बृहस्पतिवार शाम को उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। उधर, भूटान यात्रा पर गए गृह सचिव राजीव गौबा को तुरंत वापस लौटने को कहा गया है।
सुरक्षा मामले से जुड़े अधिकारी के मुताबिक, कार बम से हमला जैसी घटनाएं सीरिया या अफगानिस्तान जैसे जगहों पर होती है। इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच घाटी में हुआ यह हमला सामान्य नहीं है। हालांकि 1996 और 2000 में कार बम से हमले हो चुके हैं लेकिन वे इतने बड़े नहीं थे।
सूत्रों के मुताबिक, सीआरपीएफ ने पिछले महीने ही अपनी बैठक में इस बात पर चर्चा की थी कि घाटी में कार बम से हमला होता है तो उससे कैसे निपटा जाए लेकिन फोर्स किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी थी।