पुलवामा आतंकी हमले की सातवीं बरसी पर देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। तमाम जगहों पर लोगों ने बलिदानियों को याद कर उन्हें नमन किया। लेकिन इस हमले के सात साल बाद भी बलिदानी सीआरपीएफ परिवारों के जख्म ताजा है। जानिए, बलिदानियों के परिवारों के हालात कैसे हैं...
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले की सातवीं बरसी पर शनिवार को देशभर में बलिदानी सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर कई बलिदानियों के परिवारों ने अपने प्रियजनों को याद किया, लेकिन कुछ परिवारों ने यह भी कहा कि उन्हें किए गए सरकारी वादों का अभी तक इंतजार है।
परिवारों का दर्द अब भी कायम
बलिदानी जवान जैमल सिंह की पत्नी सुखजीत कौर ने कहा कि उनके पति के नाम पर स्टेडियम बनाने का वादा आज तक पूरा नहीं हुआ। साथ ही, घलौती रोड पर बनने वाला स्मारक द्वार भी अधूरा पड़ा है। उन्होंने भावुक होकर कहा, 'उनके बिना जिंदगी कितनी कठिन है, यह सिर्फ हम ही जानते हैं।' उनका बेटा, जो हमले के समय करीब साढ़े पांच साल का था, अब 12 साल का हो गया है और अक्सर अपने पिता को याद करता है। पंजाब के तरनतारन जिले के गंडीविंड गांव में बलिदानी सुखजिंदर सिंह के परिवार ने भी उन्हें याद किया। उनके भाई ने मांग की कि बलिदानी के नाम पर बने सरकारी स्कूल को 12वीं तक अपग्रेड किया जाए और उनके नाम पर बन रहा स्टेडियम जल्द पूरा किया जाए।
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पुलवामा आतंकी हमला
14 फरवरी 2019 को जैश-ए-मोहम्मद के एक आत्मघाती आतंकी ने विस्फोटकों से भरी कार सीआरपीएफ के काफिले की बस से टकरा दी थी। इस हमले में 40 CRPF जवान बलिदान हो गए थे। यह हाल के वर्षों में देश के सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक था।
तमाम राजनेताओं ने दी श्रद्धांजलि
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि पुलवामा के वीर बलिदानियों का बलिदान कभी नहीं भुलाया जा सकता। वहीं टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी कहा कि यह भारत के इतिहास के सबसे दुखद दिनों में से एक था। उन्होंने कहा, बलिदानी जवान साधारण परिवारों से थे, लेकिन उन्होंने असाधारण साहस दिखाया। देश को उनकी शहादत के प्रति जवाबदेही, सुरक्षा में पारदर्शिता और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की जरूरत है।