1970 से पहले पुडुचेरी में टीबी की जांच ऐसे होती थी
- फोटो : परीक्षित निर्भय/अमर उजाला/एआई
मौखिक शव परीक्षण साक्षात्कार पर आधारित सर्वे
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में टीबी की पहचान होने के बाद भी कई मरीज इलाज के लिए अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं जिसकी वजह से उनकी जान का जोखिम भी बढ़ने लगता है। जांच कराने के बाद अगर मरीज समय गंवाए बिना अस्पताल में भर्ती होता है तो उसे बचाने और पहले की तरह स्वस्थ होने की संभावना कई गुना अधिक होती है। इसलिए देश के सभी जिलों में सिर्फ निगरानी या जांच नहीं, बल्कि संक्रमित रोगियों के उपचार को भी प्राथमिकता देना बहुत जरूरी है। दरअसल मौखिक शव परीक्षण एक साक्षात्कार आधारित सर्वे है, जिसमें मृत व्यक्ति के परिजन से कुछ सवाल पूछे जाते हैं। उदाहरण के तौर पर उनसे मृतक के लक्षण, इलाज का इतिहास, अस्पताल में भर्ती, और मृत्यु के समय की परिस्थितियों के बारे में पूछा जाता है।
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पुडुचेरी की आईआरएल प्रयोगशाला ने टीबी बैक्टीरिया की यह माइक्रोस्कोपिक तस्वीर जारी की।
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