सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत सरकारी काम करने वाले कर्मचारियों की पहचान को निजी जानकारी नहीं माना जा सकता। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने यह फैसला दिया है। इसके साथ ही सीआईसी ने रेलवे को दो अलग-अलग मामलों में ड्यूटी पर तैनात यात्रा टिकट जांचकर्ताओं (टीटीई) के नाम और उनके पद की जानकारी देने को कहा है।
सूचना आयुक्त स्वागत दास ने उत्तर पश्चिम रेलवे और पश्चिम रेलवे के खिलाफ दिए गए अलग-अलग आदेशों में कहा कि रेलवे ने टीटीई के नाम और पद की जानकारी देने से इनकार करने के लिए आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) में दी गई छूट का गलत इस्तेमाल किया। ये टीटीई अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे।
किन टीटीई की जानकारी मांगी गई थी?
एक अपील उदयपुर एक्सप्रेस में तैनात एक टीटीई से जुड़ी थी। इसमें अपीलकर्ता ने उस कर्मचारी का नाम और पद, शिकायतों से जुड़ी जानकारी, सतर्कता दस्तावेज, अनुशासनात्मक कार्रवाई और सेवा से जुड़ी अन्य जानकारियां मांगी थीं। दूसरा मामला, असरवा-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस से जुड़ा था। इसमें अपीलकर्ता ने ड्यूटी पर तैनात टीटीई का नाम, कर्मचारी पहचान संख्या और पद की जानकारी मांगी थी।
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क्या रेलवे की दलील को आयोग ने माना?
दोनों मामलों में रेलवे ने जानकारी देने से इनकार कर दिया था। रेलवे का कहना था कि यह जानकारी तीसरे पक्ष की निजी जानकारी है और आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) के तहत इसे सार्वजनिक करने से छूट मिली हुई है।
सीईसी ने रेलवे की दलील पर क्या कहा?
रेलवे की दलील को खारिज करते हुए आयोग ने कहा कि सरकारी नौकरी में रहते हुए आधिकारिक काम करने वाले कर्मचारी की पहचान, उसके सरकारी काम से जुड़ी जानकारी होती है। इसे सिर्फ इसी आधार पर आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) के तहत निजी जानकारी नहीं माना जा सकता।
टीटीई की पहचान पहले से कहां दर्ज होती है?
पश्चिम रेलवे से जुड़े मामले में आयोग ने कहा कि आरटीआई कानून के तहत आधिकारिक काम करने वाले सरकारी कर्मचारी का नाम और पद निजी जानकारी नहीं माना जा सकता। आयोग ने कहा कि टीटीई का नाम और पद ड्यूटी के दौरान पहने जाने वाले आधिकारिक पहचान पत्र और यात्रियों के लिए लगाए जाने वाले आरक्षण चार्ट पर पहले से ही दर्ज होता है।
जानकारी देने से इनकार क्यों नहीं किया जा सकता?
आयोग ने कहा, जब ऐसी जानकारी खुद सार्वजनिक प्राधिकरण की ओर से स्वेच्छा से और अनिवार्य रूप से सार्वजनिक की जाती है, तो आरटीआई कानून के तहत निजी जानकारी की छूट का हवाला देकर इसे देने से इनकार नहीं किया जा सकता।