गंगा सफाई मामले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने फिर से राष्ट्रीय गंगा सफाई मिशन (एनएमसीजी) के वरिष्ठ अधिकारी को फटकार लगाई है। एनजीटी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि गंगा सफाई के नाम पर संसाधनों और समय का सिर्फ नुकसान ही किया जा रहा है।
विभागों में आपसी संवाद न कायम होने के कारण गंगा में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के लिए आज तक कोई ठोस योजना नहीं तैयार हो सकी है। प्राधिकरणों के इस दलील पर भी एनजीटी ने नाराजगी जाहिर की जिसमें वे गंगा किनारे सभी उद्योगों के जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेएलडी) होने की बात कह रहे हैं। पीठ ने कहा कि उद्योग संघ स्वयं जेएलडी के आधारहीन होने की बात ट्रिब्यूनल के समक्ष स्वीकार चुके हैं।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को एमसी मेहता व गंगा से जुड़े अन्य मामलों पर सुनवाई की। याची एमसी मेहता ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के प्राधिकरण यूपी में गंगा किनारे उद्योगों के आंकड़े की गलत तस्वीर पेश कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के मुताबिक यूपी में गंगा किनारे कुल 6385 उद्योग हैं। जबकि अन्य केंद्रीय एजेंसी के मुताबिक यूपी में कुल 1 लाख 40 हजार उद्योग स्थित हैं। वहीं यूपीपीसीबी ने इस पर आपत्ति करते हुए कहा कि याची का आंकड़ा सिर्फ नामांकन का है।