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अभी भी जनता मोदी के साथ पर, धैर्य की भी सीमा होती है 

Mon, 21 Nov 2016 02:40 AM IST
राजीव जायसवाल/ अमर उजाला, दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला
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नरेंद्र मोदी के पुराने 500 और 1,000 रुपये की करेंसी को चलन से बाहर करने के निर्णय को अभी तक आम जनता का साथ मिल रहा है। तकलीफ  उठा कर भी शहरों और गांवों के बहुत से नागरिक सरकार के साथ सहयोग कर रहे हैं। नोएडा से अमर उजाला की एक पाठिका मंजू श्रीवास्तव ने ई-मेल में लिखा कि विमुद्रीकरण के जरिए देश से काला धन समाप्त करने की सरकार की मुहिम अत्यंत सराहनीय है। लेकिन, कुछ कमियां भी महसूस हो रही हैं।
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नोटबंदी से पहले यदि कुछ बातें तय कर ली जातीं तो इतनी परेशानी नहीं होती, जितनी कि अभी हो रही है। जैसे स्याही का सुचारू रूप से वितरण न होना आदि। देश हित में जनता का सहयोग अपेक्षित है। बदलाव में कुछ परेशानियां तो आती हैं। धैर्य रखे जनता। बाकी समय बताएगा। जाहिर है कि जनता को सरकार की मंशा पर कोई शक नहीं है लेकिन नोटबंदी के निर्णय के अमल पर जरूर कुछ सवाल उठते हैं।

इस निर्णय को लागू करने से पहले ही सरकार को 500 और 1,000 रुपये के नए नोट पर्याप्त मात्रा में छाप लेने चाहिए थे। समय का चुनाव भी ऐसे वक्त का करना चाहिए था जब अधिकतर शुभ काम मसलन शादी-ब्याह, जेवर, गाड़ी और मकान आदि खरीदने का शुभ मुहूर्त न हो। देश के सारे एटीएम कार्यरत हों और नए नोट का साइज पुराने के समान हो ताकि एटीएम के कैलिबरेशन की जरूरत ही न पड़े। सरकार का 2,000 रुपये के नोट को जारी करना तो बेहद ही अटपटा है। दूध, अंडे, सब्जी या राशन में इसका उपयोग है ही नहीं।
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अगर किसी गरीब को 2,000 रुपये के नोट मिल गए तो समझो आफत आ गई। कोई चेंज देने को तैयार नहीं। पैसा पास में होने के बावजूद निर्धनता का आभास होता है। आशा है कि सरकार 2,000 रुपये के नोट को सीमित ही रखेगी और आम जनता को जल्द से जल्द राहत पहुंचाएगी। सरकार को ज्ञात रहे कि जनता की धैर्य की एक सीमा होती है।
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