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सेहत से हो रहा खिलवाड़: 220 दवाओं के सैंपल टेस्ट में फेल, कैसे धड़ल्ले से बनाई जा रहीं नकली दवाएं?

Tue, 22 Sep 2026 09:33 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी एएनआई, नई दिल्ली

सार

अगस्त 2026 की ड्रग टेस्टिंग रिपोर्ट में देशभर के सरकारी लैब में जांचे गए 220 सैंपल तय क्वालिटी मानकों पर खरे नहीं उतरे। दिल्ली से लिया गया एक सैंपल नकली मिला, जिसमें कथित तौर पर दूसरे ब्रांड के नाम का इस्तेमाल हुआ। इस रिपोर्ट के बाद से एक बार फिर क्वालिटी टेस्ट में कई दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
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220 दवा सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अगस्त 2026 की ड्रग टेस्टिंग रिपोर्ट ने देश में दवाओं की क्वालिटी की निगरानी के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। केंद्र और राज्य स्तर की सरकारी प्रयोगशालाओं में टेस्ट किए गए कुल 220 ड्रग सैंपल तय क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरे नहीं उतरे। वहीं, दिल्ली के नेशनल कैपिटल टेरिटरी से लिया गया एक सैंपल नकली या जाली दवा पाया गया। खास बात यह है कि इस मामले में कथित तौर पर किसी दूसरे ब्रांड के नाम का बिना इजाजत इस्तेमाल किया गया था।
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रिपोर्ट में क्या बताया गया है? 
अगस्त 2026 में, देश में बिकने वाली दवाओं की क्वालिटी की जांच के लिए किए गए रूटीन टेस्ट के दौरान बड़ी संख्या में सैंपल तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। सरकारी अलर्ट के मुताबिक, सेंट्रल ड्रग लेबोरेटरीज ने 29 सैंपल को 'नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी' (NSQ) पाया। वहीं, स्टेट ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरीज ने 191 सैंपल को एनएसक्यू घोषित किया। इसका मतलब है कि दोनों स्तरों की टेस्टिंग में कुल 220 सैंपल तय मानकों से बाहर पाए गए।

दूसरी कंपनी के ब्रांड नाम का इस्तेमाल किया
वहीं, सबसे अहम बात यह है कि दिल्ली से ली गई दवा का एक सैंपल नकली पाया गया है। सरकारी नोट के मुताबिक, यह दवा कथित तौर पर उन अनधिकृत निर्माताओं ने बनाई थी, जिन्होंने किसी दूसरी कंपनी के ब्रांड नाम का इस्तेमाल किया था। मामले की जांच चल रही है और संबंधित कानूनों व नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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एनएसक्यू और नकली दवा के बीच अंतर क्या है?
एनएसक्यू (स्टैंडर्ड क्वालिटी की नहीं):
इसका मतलब है कि टेस्ट में दवा की क्वालिटी का पैमाना जरूरी स्टैंडर्ड से कम पाया गया। सीडीएससीओ के अनुसार, किसी सैंपल के एनएसक्यू पाए जाने का मतलब यह नहीं है कि उस ब्रांड की हर दवा या बाजार में मौजूद सभी बैच खराब हैं। टेस्टिंग आम तौर पर उस खास सैंपल और बैच की क्वालिटी पर केंद्रित होती है।

नकली दवा: यह मामला नियामक नियमों की एक अधिक गंभीर श्रेणी में आता है। औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत, किसी अन्य दवा के नाम से निर्मित या किसी अन्य निर्माता के उत्पाद होने का झूठा दावा करने वाली दवा को नकली माना जा सकता है।
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