मणिपुर में नागरिकों पर लगातार हो रहे हमलों से नाराज लोगों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह, उपमुख्यमंत्री नेमचा किपजेन, गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम और सांसद अधिकारिमयुम शारदा देवी के पुतले फूंके। प्रदर्शनकारियों ने इन सभी नेताओं से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की। उनका कहना है कि सरकार राज्य में शांति कायम करने और आम लोगों की जान-माल की सुरक्षा करने में नाकाम रही है। हाल ही में हुए एक हमले में तीन युवाओं की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य घायल हो गए थे।
तीन संगठनों ने मिलकर किया प्रदर्शन
यह विरोध प्रदर्शन 'उयुमपोक मामंग लेइकाई नुपी', 'लामजिंग लुप' और 'उयुमपोक मामंग लेइकाई वेलफेयर यूथ क्लब' के बैनर तले किया गया। मंगलवार सुबह उयुमपोक मामंग लेइकाई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठनों ने एक दिन पहले हुए हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि राज्य में लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल बन गई है और सरकार को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने चाहिए।
पीड़ित परिवार ने सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
हमले में मारे गए सुशील की चचेरी बहन रोजा ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब सरकार हालात सामान्य होने की बात कर रही है, तो फिर आम लोगों पर बार-बार हमले क्यों हो रहे हैं? रोजा ने सरकार से तुरंत दखल देने और ऐसे हमलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
केंद्रीय बल हटाने और मणिपुर पुलिस बढ़ाने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार निर्दोष ग्रामीणों की सुरक्षा नहीं कर पा रही है। उनका कहना है कि हमलों में जान गंवाने वाले कई लोग अपने परिवार का खर्च चलाने वाले अकेले सदस्य थे। उन्होंने प्रभावित इलाकों से केंद्रीय सुरक्षा बलों को हटाने और वहां मणिपुर पुलिस के ज्यादा जवान तैनात करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि स्थानीय पुलिस की तैनाती बढ़ाकर लोगों की सुरक्षा बेहतर की जानी चाहिए।
नोंग्शुम हमले को लेकर भी जताई नाराजगी
रोजा ने नोंग्शुम में नागरिकों पर हुए हालिया हमले को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस हमले के पीछे कुकी उग्रवादी थे। हालांकि, यह आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। रोजा ने सवाल किया कि अगर राज्य में सुरक्षा व्यवस्था सुधरने के दावे किए जा रहे हैं, तो फिर आम लोगों पर होने वाले हमले क्यों नहीं रुक रहे? उन्होंने अधिकारियों से हिंसा प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
ग्रामीणों और छात्र संगठनों ने भी दिया साथ
प्रदर्शन के दौरान खोंगबल तंगखुल के ग्रामीणों, महिला संगठन और छात्र संगठन के सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल भी पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचा। ग्राम प्रमुख अखिल ज़िमिक के नेतृत्व में आए इस प्रतिनिधिमंडल ने परिवारों के प्रति संवेदना जताई और विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। लोगों ने मांग की कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और ऐसे कदम उठाए जाएं, जिससे आम लोग बिना डर के अपने घरों में रह सकें।
मई 2023 से हिंसा की चपेट में है मणिपुर
मणिपुर में मई 2023 से जातीय हिंसा जारी है। लंबे समय से चले आ रहे इस संकट के कारण राज्य के कई इलाकों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शांति बहाल करने के आश्वासनों के बावजूद लोगों में डर कम नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह केवल बयान देने के बजाय जमीन पर सुरक्षा के ठोस इंतजाम करे।
पुलिस ने बताई हिंसा की घटनाओं की पूरी जानकारी
राज्य पुलिस के मुताबिक, हालिया हिंसा में चार लोगों की मौत हुई है और कई लोग घायल हुए हैं। घायलों में केंद्रीय सुरक्षा बलों के तीन जवान भी शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि हिंसा की घटनाओं में दो समुदायों के बीच झड़प, आईईडी विस्फोट और ग्रामीणों पर सशस्त्र हमले शामिल हैं। राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) लहरी दोरजी लातू ने घटनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिंसा की घटनाओं का सिलसिला थौबल जिले में देर रात हुई झड़प से शुरू हुआ।
संगीत कार्यक्रम के दौरान पथराव से बिगड़े हालात
लातू के मुताबिक, 18 अक्टूबर की रात करीब 11:20 बजे थौबल जिले के खंगाबोक पाली बाजार में एक संगीत कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान कुछ अज्ञात लोगों ने पथराव किया, जिसके बाद दो समुदायों के बीच तनाव बढ़ गया। देखते ही देखते हालात बिगड़ गए और मामला हिंसक झड़प तक पहुंच गया।
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चेरापुर में एक की मौत, घरों और दुकानों में लगाई आग
थौबल जिले के खंगाबोक इलाके के चेरापुर में भी एक संगीत कार्यक्रम के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प हुई। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। खबरों के मुताबिक, हिंसा के दौरान चार घरों और दुकानों में आग लगा दी गई। एक वाहन को भी नुकसान पहुंचा। लगातार हो रही हिंसक घटनाओं के बीच प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। उनकी मांग है कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाए जाएं, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो और राज्य में शांति बहाल करने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं।