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Supreme Court: सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ भड़काऊ गाने का विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस FIR पर उठाए सवाल

Mon, 10 Feb 2025 03:02 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट ने कथित भड़काऊ गाने के विवाद में कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ दर्ज गुजरात पुलिस की एफआईआर पर सवाल उठाए हैं। जस्टिस अभय एस ओक और उज्जवल भुइंया की पीठ ने कहा कि गुजरात उच्च न्यायालय ने कविता के अर्थ को सही नहीं माना। पीठ ने कहा कि यह बस एक कविता है और यह किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने बीते दिनों एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें सुनाई दिए गाने पर विवाद हो गया। कांग्रेस सांसद के खिलाफ गुजरात के एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने कांग्रेस सांसद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया था। 
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जवाब दाखिल करने के लिए गुजरात सरकार के वकील ने अदालत से समय मांगा, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ्ते के लिए मामले पर सुनवाई टाल दी है। गौरतलब है कि इमरान प्रतापगढ़ी ने एफआईआर रद्द कराने के लिए गुजरात हाईकोर्ट में अपील की थी, लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने इसकी मंजूरी नहीं दी थी। 

41 साल पुराने मामले में पूर्व IPS कुलदीप शर्मा को 3 महीने की सजा
चार दशक से भी अधिक पुराने मामले में पूर्व आईपीएस अफसर कुलदीप शर्मा को गुजरात की एक अदालत ने 3 महीने की सजा सुनाई है। कुलदीप को कांग्रेस नेता अब्दुल हाजी इब्राहिम पर हमले का दोषी पाया गया। भुज के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बीएम प्रजापति की अदालत ने तत्कालीन पुलिस निरीक्षक जीएच वासवदा को भी तीन महीने की कैद की सजा सुनाई। अदालत ने शर्मा और वासवदा पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। शर्मा और वासवदा को 1984 में कांग्रेस नेता इब्राहीम (अब दिवंगत) को उनके कार्यालय में गलत तरीके से बंधक बनाने के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 342 के तहत दोषी ठहराया गया। तब शर्मा भुज के पुलिस अधीक्षक थे।

अतिक्रमण मामले में उत्तराखंड के अधिकारियों को तलब करने वाले एनजीटी के आदेश पर सुप्रीम रोक
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें अतिक्रमण के एक मामले में उत्तराखंड के शहरी विभाग के प्रमुख सचिव और देहरादून के डीएम को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा गया था। जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने  उत्तराखंड सरकार से कहा कि वह राहत के लिए दो सप्ताह के भीतर एनजीटी, दिल्ली के समक्ष आवेदन दायर करे। एनजीटी का आदेश एक ऐसे मामले में जारी किया गया था जिसमें राज्य के अधिकारियों, उसके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को ‘सार्वजनिक भूमि/नदी निकाय से अतिक्रमण हटाने और पर्यावरण कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करने’ के लिए तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।
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एमबीबीएस के लिए अयोग्य घोषित छात्र की अर्जी पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट शारीरिक रूप से दिव्यांग छात्र की याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है जिसे बिहार के एक सरकारी कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए अयोग्य ठहरा दिया गया था। शीर्ष अदालत ने सुनवाई पूरी होने तक छात्र के दाखिले से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने को भी कहा। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने बिहार के बेतिया स्थित मेडिकल कॉलेज, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) और अन्य को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है।
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