संशोधन कानून में 16 साल से कम की किशोरी से दुष्कर्म के मामले में कम से कम 20 साल कैद का प्रावधान है, जो अब तक 10 साल थी। ऐसे मामलों में आजीवन कारावास की सजा भी दी जा सकती है।
कानून में स्पष्ट किया गया है कि आजीवन कारावास का मतलब मृत्यु तक कैद है। महिलाओं से दुष्कर्म पर न्यूनतम सात साल के कठोर कारावास को बढ़ाकर 10 साल किया गया है। दोषी को आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है।
दो महीने में जांच खत्म करने को बनाया अनिवार्य
संशोधन कानून में जांच और मुकदमों को निपटाने की समय सीमा भी तक की गई है। कानून कहता है कि हर तरह के दुष्कर्म के मामले की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य है। मुकदमे की सुनवाई भी दो महीने में पूरी करना अब अनिवार्य होगा। याचिका का निस्तारण भी छह महीने के भीतर करने को कहा गया है। साथ ही 16 साल से कम उम्र की किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी को अग्रिम जमानत न देने का प्रावधान भी संशोधन कानून में है।