कोरोना काल में अपने कर्मचारियों को संक्रमण से बचाने के लिए कंपनियां 'वर्क फ्रॉम होम' का आइडिया अपना रही हैं तो स्कूल 'ऑनलाइन क्लास' चलाकर बच्चों की शिक्षा जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं। अब किसान आंदोलन का संघर्ष जारी रखने के लिए किसान नेता भी इन्हीं उपायों को अपनाने पर विचार कर रहे हैं। किसान नेताओं की सोच है कि धरना स्थलों पर किसानों की संख्या सीमित रखकर उन्हें घर से ही 'प्रोटेस्ट फ्रॉम होम' और 'ऑनलाइन प्रोटेस्ट' करने के लिए प्रेरित किया जाए।
इससे किसानों को कोरोना के संकट से भी बचाया जा सकेगा तो ऑनलाइन प्रोटेस्ट जारी रखकर केंद्र सरकार पर विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने का दबाव भी बनाया जा सकेगा। पश्चिम बंगाल चुनाव और यूपी पंचायत चुनावों में भाजपा की हुई करारी पराजय को अपनी जीत बता रहे किसान नेता अपना आन्दोलन कमजोर होने नहीं देना चाहते हैं, लेकिन इस कोरोना काल में किसानों की कम होती भागीदारी के बीच आन्दोलन को चलाते रहना भी किसान नेताओं के लिए नई चुनौती बन गया है। यही कारण है कि किसान नेता अब 'प्रोटेस्ट फ्रॉम होम' और 'ऑनलाइन प्रोटेस्ट' का आइडिया अपना रहे हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा के सभी नेता सिंघु बॉर्डर पर एक बैठक करने वाले हैं। इस बैठक में आंदोलन को आगे बनाए रखने के स्वरूप पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस बैठक के बाद ही आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति सामने आ सकती है। संयुक्त किसान मोर्चा के जरिये इसके बारे में समुचित घोषणा 20 मई को की जा सकती है।
सबसे ज्यादा संभावना इस बात की है कि किसान अब आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए हाइब्रिड मॉडल का इस्तेमाल करेंगे। इसका अर्थ यह है कि जिन स्थलों पर इस समय धरना-प्रदर्शन चल रहा है, वहां किसानों की संख्या सीमित रखते हुए धरना-प्रदर्शन इसी तरह जारी रखा जाए।
जिन राज्यों-क्षेत्रों में कोरोना की स्थिति नियंत्रण में है वहां फिजिकल प्रोटेस्ट जारी रखा जाए। लेकिन जहां संक्रमण की स्थिति गंभीर है, वहां ऑनलाइन माध्यम को अपनाने पर जोर दिया जा सकता है।
इसके साथ ही जो किसान दूर-दराज क्षेत्रों में रहते हैं, लॉक डाउन के कारण उनके आंदोलन स्थलों तक आने में परेशानी भी होगी और इस दौरान उन्हें कोरोना संक्रमित होने का खतरा भी बना रहेगा। इससे बचने के लिए उन्हें अपने घर से ही ऑनलाइन प्रोटेस्ट में शामिल होने की अपील की जाएगी। किसानों से ऑनलाइन आन्दोलन चलाकर अन्य किसानों को भी आन्दोलन कर साथ जुड़ने की अपील भी की जायेगी।
स्वास्थ्य का मुद्दा भी उठाएंगे
कोरोना से निबटने में पूरे देश का स्वास्थ्य तंत्र नाकाम साबित हुआ है। कभी पीपीई और मास्क की कमी के कारण तो कभी ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों की जान जा रही है। किसान नेता अब अपनी मांगों के साथ देश की जनता के सामने स्वास्थ्य तंत्र में सरकार की नाकामी का मुद्दा भी उठाएंगे।
रुकने नहीं देंगे किसान आन्दोलन
एक शीर्ष किसान नेता ने अमर उजाला को बताया कि देश के सभी किसान नेता इस बात पर एकमत हैं कि पश्चिम बंगाल और यूपी के पंचायत चुनाव में भाजपा को मिली करारी हार में किसान आंदोलन का भारी प्रभाव है। किसानों को लग रहा है कि अगर भाजपा पर इसी तरह का दबाव बनाए रखा जाए तो आने वाले दिनों में उसे विवादित नए कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए मजबूर किया जा सकेगा।
यही कारण है कि इस मुकाम तक पहुंच चुके किसान आंदोलन को अब किसान नेता किसी भी तरह कमजोर नहीं होने देना चाहते। लेकिन पहले खेतों में कटाई और अब कोरोना के बढ़ते खतरे के बीच धरना स्थलों पर आ रहे किसानों की संख्या काफी कम हुई है। ऐसे में अब किसान नेताओं के सामने आंदोलन को उसी तेजी के साथ बरकरार रखने की चुनौती बढ़ गई है। यही कारण है कि किसान नेता अब नए-नए तरीके इस्तेमाल कर किसान आंदोलन को आगे बढ़ाते जारी रखना चाहते हैं।